बलरामपुर। छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा पर ओरसा घाट में हुए भीषण बस हादसे के बाद मंगलवार का दिन बलरामपुर जिले के लिए शोक की काली चादर लेकर आया। हादसे में जान गंवाने वाले 10 लोगों में से अकेले पीपरसोत गांव के 7 मृतकों का जब एक साथ अंतिम संस्कार किया गया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। गांव के श्मशान घाट पर एक साथ जलती सात चिताओं ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।
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पूरा गांव बना श्मशान, बिलख पड़े परिजन
रविवार को एक शादी की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं जब बारात लेकर जा रही बस घाटी में पलट गई। सोमवार शाम जब मृतकों के शव पीपरसोत पहुंचे, तो गांव में चीख-पुकार मच गई। मंगलवार सुबह जब एक साथ सात अर्थियां सजीं, तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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पीपरसोत: यहाँ 7 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ।
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महाराजगंज: यहाँ 2 मृतकों को अंतिम विदाई दी गई।
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बुद्धडीह: यहाँ 1 मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम यात्रा में आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोग शामिल हुए। गांव वालों ने बताया कि ऐसा मंजर पहले कभी नहीं देखा गया, जहां पूरा गांव ही एक साथ अपनों को कंधा दे रहा था।
हादसे का दर्द: 10 की मौत, 78 घायल
झारखंड के लातेहार जिले के महुआडांड़ थाना क्षेत्र स्थित ओरसा बंगलाधारा घाटी में यह दर्दनाक हादसा हुआ था। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर से बारात लेकर जा रही बस अनियंत्रित होकर पलट गई थी।
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इस हादसे में कुल 10 लोगों की मौत हुई, जिनमें 4 महिलाएं भी शामिल थीं।
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घायलों की संख्या 78 है, जिनमें से 19 की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
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घायलों का इलाज छत्तीसगढ़ और झारखंड के विभिन्न अस्पतालों में जारी है।
खुशियां मातम में बदलीं
हादसे का शिकार हुए लोग एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। बारात घर से हंसी-खुशी निकली थी, लेकिन ओरसा घाट के अंधे मोड़ पर बस काल का ग्रास बन गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर पीड़ितों को ढांढस बंधाया है और शासन की ओर से मिलने वाली सहायता राशि की प्रक्रिया शुरू कर दी है।








