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विवाद के बीच जगद्गुरु रामभद्राचार्य की सफाई,बोले प्रेमानंद पुत्रवत हैं, अभद्र टिप्पणी नहीं की, पर चमत्कार को नमस्कार नहीं करता

Rambhadracharya VS Premanand :संस्कृत और धार्मिक विमर्श को लेकर बीते दिनों उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। तुलसी पीठाधीश्वर, ...

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| सतना टाइम्स

Rambhadracharya maharaj

Rambhadracharya VS Premanand :संस्कृत और धार्मिक विमर्श को लेकर बीते दिनों उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। तुलसी पीठाधीश्वर, पद्मविभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मंगलवार को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के प्रति किसी भी प्रकार की अभद्र या अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज को पुत्रवत बताया है।

Rambhadracharya maharaj

क्या है असली विवाद की जड़?

दरअसल दो दिन पहले जगद्गुरु रामभद्राचार्य का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे प्रेमानंद महाराज से संस्कृत बोलने और शास्त्रों का अर्थ समझाने की चुनौती देते नजर आ रहे थे। इस वीडियो के वायरल होते ही प्रेमानंद के अनुयायियों ने सोशल मीडिया पर कड़ा विरोध जताया। कई संतों ने भी इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

संस्कृत पढ़ना अपमान नहीं, आवश्यकता है”

विवाद तूल पकड़ने के बाद जगद्गुरु ने सफाई देते हुए कहा की आज सनातन धर्म चारों ओर से चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में हम सभी हिंदुओं को मिलकर एकजुट होना चाहिए। हमने 500 वर्षों की लंबी लड़ाई लड़ी और श्रीराम जन्मभूमि का मंदिर प्राप्त किया। अब काशी और मथुरा भी अवश्य हमारे होंगे। ऐसे समय में आपसी मतभेद नहीं, बल्कि एकता की जरूरत है।

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चाहे शिष्य धीरेंद्र शास्त्री हो -रामभद्राचार्य

उन्होंने कहा कि वे हर किसी को, चाहे उनके शिष्य धीरेंद्र शास्त्री हों या कोई अन्य, संस्कृत का अध्ययन करने की सलाह देते हैं। भारत की पहचान संस्कृत और संस्कृति है। यदि हमें अपनी जड़ों को समझना है तो संस्कृत पढ़ना अनिवार्य है। मैं आज भी प्रतिदिन 18-18 घंटे अध्ययन करता हूं। इसलिए किसी को संस्कृत सीखने की प्रेरणा देना अपमानजनक कैसे हो सकता है?

चमत्कार को नमस्कार नहीं करता

जगद्गुरु ने साफ शब्दों में कहा है कि हां, मैं चमत्कार को नमस्कार नहीं करता। यह मेरा स्पष्ट मत है। शास्त्र और ज्ञान की शक्ति किसी भी चमत्कार से बड़ी है। यही बात मैं अपने शिष्यों और अनुयायियों को भी कहता हूं।

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प्रेमानंद के लिए शुभकामनाएँ

अंत में जगद्गुरु ने प्रेमानंद महाराज के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा प्रेमानंद जी मेरे पुत्रवत हैं। उनके लिए मेरे मन में केवल स्नेह और आशीर्वाद है। मैं उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं। जब भी वे मेरे पास आएंगे, मैं उन्हें हृदय से लगाऊंगा और आशीर्वाद दूंगा।

पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय जयदेव विश्वकर्मा, जनसरोकार और जमीनी हकीकत की आवाज़ हैं। सामाजिक सरोकार, सकारात्मक पहल, राजनीति, स्वास्थ्य और आमजन से जुड़े मुद्दों पर इनकी पकड़ गहरी है। निष्पक्षता और सटीक ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले जयदेव, जनता के असली सवालों को सामने लाने में यक़ीन रखते हैं।... और पढ़ें