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डूबती परंपरा को मिली भटनवारा में संजीवनी: चित्रकूटधाम के कलाकारों द्वारा भव्य रामलीला का मंचन; सत्यनारायण विश्वकर्मा बने सारथी, उमड़ रही भक्तों की भारी भीड़

भटनवारा/सतना | जिले के उचेहरा जनपद अंतर्गत आने वाली मां कालिका की पावन नगरी ग्राम पंचायत भटनवारा में विगत वर्षों की भांति इस ...

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| सतना टाइम्स

भटनवारा/सतना | जिले के उचेहरा जनपद अंतर्गत आने वाली मां कालिका की पावन नगरी ग्राम पंचायत भटनवारा में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी प्रभु श्री राम की पावन लीला का भव्य आयोजन किया जा रहा है। हनुमान जी, शनि महाराज और वासुदेव जी के विशेष सानिध्य में आयोजित हो रही इस रामलीला में भगवान श्री राम के आदर्शों को जीवंत करने के लिए विशेष रूप से प्रभु की तपोभूमि चित्रकूटधाम से कलाकारों की मंडली पधारी है। इस सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सव को देखने के लिए भटनवारा सहित आसपास के दर्जनों गांवों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु बड़े ही हर्ष और उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं।

मुख्य बिंदु 

  • विलुप्त होती विधा को बचाने का संकल्प: आधुनिकता और सोशल मीडिया के इस दौर में जहां रामलीला जैसी प्राचीन विधाएं दम तोड़ रही हैं, वहीं भटनवारा के युवाओं और बुजुर्गों ने इसे जीवित रखने का सराहनीय बीड़ा उठाया है।

  • चित्रकूटधाम की मंडली बिखेर रही जलवा: पावन नगरी चित्रकूट से आए मंझे हुए कलाकारों के संवाद और अभिनय को देखकर दर्शक भाव-विभोर हो रहे हैं।

  • सत्यनारायण विश्वकर्मा का अनुकरणीय योगदान: गांव के सामाजिक और धार्मिक कार्यों में हमेशा अग्रणी रहने वाले सत्यनारायण विश्वकर्मा इस पूरे आयोजन के मुख्य सूत्रधार और सक्रिय स्तंभ बने हुए हैं।

धार्मिक चेतना के केंद्र बने सत्यनारायण विश्वकर्मा

भटनवारा में इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में गांव के प्रतिष्ठित समाजसेवी सत्यनारायण विश्वकर्मा जी का समर्पण जगजाहिर है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में रामलीला का मंचन हो, श्रीमद्भागवत कथा हो, अखंड रामायण पाठ हो या फिर श्री रामचरितमानस का गायन— सत्यनारायण जी हर धार्मिक कार्य में सबसे आगे रहकर अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। सनातन संस्कृति के प्रति उनके इस अनन्य प्रेम की प्रशंसा पूरे अंचल में हो रही है।

सरपंच सहित गांव के प्रबुद्ध जन संभाल रहे व्यवस्थाएं

इस सांस्कृतिक महायज्ञ को सुचारू रूप से चलाने के लिए भटनवारा पंचायत के वरिष्ठ नागरिक और वर्तमान सरपंच राजकुमार यादव जी स्वयं मुस्तैद हैं। उनके साथ गांव के प्रबुद्ध नागरिक और युवाओं की टोली व्यवस्थाएं संभालने में जुटी है, जिनमें प्रमुख रूप से:

वक्त की मांग: इस प्राचीन विरासत को सहेजने की जरूरत

रामलीला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी भावी पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। भटनवारा की जनता ने यह साबित कर दिया है कि अगर समाज ठान ले, तो अपनी डूबती हुई परंपराओं को फिर से पुनर्जीवित किया जा सकता है। देर रात तक चलने वाली इस रामलीला में हर दिन सीता स्वयंवर, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और राम वनगमन जैसे प्रसंगों को देखकर पूरा माहौल “जय श्री राम” के जयकारों से गुंजायमान हो रहा है।

आयोजन का संक्षिप्त विवरण 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें