केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर ओलंपिक के समापन समारोह में एक बड़ा और दृढ़ संकल्प वाला ऐलान किया है। उन्होंने देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की निश्चित समय सीमा घोषित की है।
नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन
-
ऐलान: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से ‘लाल आतंक’ (नक्सलवाद) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।
-
बस्तर का विकास: शाह ने यह भी कहा कि अगले पाँच वर्षों में बस्तर संभाग (जिसमें कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा जैसे सात जिले शामिल हैं) को देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाया जाएगा।
-
सफलता के कगार पर: उन्होंने कहा कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किया था, वह अब प्राप्ति के कगार पर है। जिस बस्तर में कभी ‘लाल सलाम’ के नारे लगते थे, अब वहाँ ‘भारत माता की जय’ के नारे गूंज रहे हैं।
नक्सलवाद छोड़कर मुख्यधारा में आएं
-
अपील: गृह मंत्री ने नक्सलवादियों से हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद एक ज़हर है जिसने इस क्षेत्र के विकास को रोक दिया था और शांति ही विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
-
पुनर्वास: उन्होंने आत्मसमर्पण करने वालों और नक्सल हिंसा के शिकार लोगों के लिए आकर्षक पुनर्वास योजना लाने की बात भी कही।
-
आधार: उन्होंने विश्वास जताया कि संवाद, सुरक्षा और समन्वय की एकीकृत, बहुआयामी रणनीति के आधार पर इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा कि 2026 का बस्तर ओलंपिक पूरी तरह से नक्सलवाद से मुक्त बस्तर में होगा।
छत्तीसगढ़ के गांव में दिखा दुर्लभ ‘सफेद गरुड़’ (अतिरिक्त खबर)
इसी बीच, छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के सलधा खम्हरिया (एम) गांव से एक अनोखी और धार्मिक खबर सामने आई है:
-
पक्षी: गांव के एक फार्म हाउस पर एक असामान्य और दुर्लभ सफेद पक्षी दिखाई दिया है, जिसे ग्रामीण गरुड़ प्रजाति का मान रहे हैं।
-
आस्था: स्थानीय लोग इस पक्षी को भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ का प्रतीक मान रहे हैं और इसे शुभ संकेत समझकर फार्म हाउस पर भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ कर रहे हैं। इस अनोखी घटना ने गांव में धार्मिक आस्था का माहौल बना दिया है।









