Maihar Nonveg Bain :माँ शारदा की धार्मिक नगरी मैहर में शारदीय नवरात्रि मेले की तैयारियाँ जोरों पर हैं। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी नवरात्रि के दौरान लाखों श्रद्धालु माँ शारदा के दर्शन करने पहुँचेंगे। धार्मिक वातावरण की पवित्रता और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है।11 दिनों तक पूरे नगर पालिका क्षेत्र में मांस, मछली और अंडे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

अनुविभागीय दण्डाधिकारी दिव्या पटेल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी करते हुए कहा है कि 22 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 यानी 11 दिनों तक पूरे नवरात्र पर्व के दौरान नगर पालिका क्षेत्र मैहर में मांस, मछली और अंडे की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
प्रशासन ने लिया सख्त निर्णय
मैहर नवरात्रि मेला देशभर में विख्यात है। पर्व के दौरान सुबह से रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ माँ शारदा देवी के मंदिर में उमड़ती है। मंदिर प्रांगण और नगर की गलियों में भक्तिभाव का वातावरण रहता है। ऐसे में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की गतिविधि, जिससे धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचे या वातावरण दूषित हो, उसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
आदेश न मानने वालों पर होगी कानूनी कार्यवाही
आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यानी, यदि कोई भी व्यक्ति इस अवधि में मांस, मछली या अंडे का विक्रय करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही होगी।
थानों और सार्वजनिक जंगहो पर आदेश प्रति होगी चस्पा
प्रशासन ने जारी आदेश में कहा है कि उक्त आदेश नागरिकों अथवा दुकानदारों को व्यक्तिगत तामील कराया जाना संभव नही है। जिससे सार्वजनिक माध्यमों, इलेक्ट्रानिक मीडिया, समाचार पत्रों के माध्यम से यह आदेश सर्वसाधारण को अवगत कराया जा रहा है। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों और चौराहों और थानों पर आदेश की प्रतियां चस्पा की जाएंगी ताकि कोई भी व्यक्ति अज्ञानवश नियम का उल्लंघन न कर सके।
धार्मिक नगरी मैहर की विशेषता
मैहर को देवी उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ माँ शारदा के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। पर्व के दिनों में देशभर से लाखों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, जिससे नगर का वातावरण पूरी तरह भक्ति और आस्था से सराबोर हो जाता है। यही कारण है कि प्रशासन हर वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए ऐसे निर्णय लेता है।







