
प्रशासन का अमला, बुलडोजर और हाई-वोल्टेज ड्रामा!

मुख्य बातें:
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प्रशासन से हाथापाई की नौबत: जैसे ही बुलडोजर आगे बढ़ा, घर के लोग महिलाओं और परिजनों को आगे कर पुलिस-प्रशासनिक टीम के सामने अड़ गए।
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सरपंच का प्रस्ताव भी खारिज: गांव की सरपंच श्रीमती सुनैना पनिका ने मौके पर पहुंचकर काफी समझाइश दी और ‘ज़मीन के बदले दूसरी ज़मीन’ देने का सरकारी ऑफर भी रखा, लेकिन विरोध के आगे प्रशासनिक कोशिशें बेअसर रहीं और अधिकारियों को खाली हाथ लौटना पड़ा।
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कांटेदार तार, फिसलन और खाट पर जिंदगी: 15 जनवरी 2026 की वह भयानक तस्वीर आज भी ग्रामीणों के दिलों में तैर रही है, जब एक बुजुर्ग महिला की गंभीर हालत होने पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण उन्हें खाट (चारपाई) पर लादकर ले जाना पड़ा था।
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रास्ते में बिछाए कांटे: आम जनता को रोकने के लिए रास्ते पर कटीली झाड़ियां और कांटेदार तार ठोक दिए गए हैं। बारिश के पानी से कच्चा रास्ता चिकना और कीचड़युक्त हो चुका है, जिससे आए दिन वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।

कानूनी शिकंजा: BNSS 152 और जबरन भू-अर्जन की अंतिम चेतावनी

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15 दिन का अल्टीमेटम: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 152 के तहत रामकरण कुशवाहा और रामनिहोर विश्वकर्मा को नोटिस थमाकर 15 दिन में रास्ता खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
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कोर्ट में पेशी: आरोपियों को अदालत में हाजिर होकर जवाब देना होगा कि क्यों न इस रास्ते को स्थायी सार्वजनिक संपत्ति घोषित कर दिया जाए।

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अनिवार्य भू-अर्जन (Land Acquisition): राजस्व विभाग की टीम को एक सप्ताह में स्थल पंचनामा और ट्रेस नक्शा तैयार करने का आदेश दिया गया है। यदि आपसी सहमति से कब्जा नहीं हटा, तो सरकार ज़मीन का अनिवार्य अधिग्रहण कर सख्त कार्रवाई करेगी।

जनहित में सड़क निर्माण आवश्यक
पंचायत सचिव और ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत द्वारा 700 मीटर सड़क का निर्माण कराया जा चुका है, लेकिन इस छोटे से टुकड़े पर विवाद के कारण पूरी सड़क का लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। यदि भू-स्वामी आपसी सहमति से रास्ता नहीं देते हैं, तो शासन अनिवार्य भू-अर्जन कर सड़क निर्माण का कार्य पूर्ण कराएगा।







