सतना। जिले के बठिया कला पंचायत अंतर्गत छूलहनी बस्ती में शुक्रवार को एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके की आँखों में आँसू ला दिए। एक 45 वर्षीय माँ ने अपनी डूबती हुई 17 साल की बेटी को बचाने के लिए खदान के गहरे और खतरनाक पानी में छलांग लगा दी। माँ ने अपनी पूरी ताकत झोंककर बेटी को सुरक्षित बाहर धकेल दिया, लेकिन खुद गहरे पानी की गहराई में समा गई।

न्यूज़ हेडलाइंस
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ममता का बलिदान: रेखा बेलदार (45) ने बेटी छोटी (17) को बचाने के लिए दी अपनी जान।
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असुरक्षित खदानें: हाई स्कूल के पीछे स्थित खदान बनी ‘डेथ ट्रैप’; प्रशासन की लापरवाही उजागर।
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घटना स्थल: छूलहनी बस्ती में मातम का माहौल; स्थानीय लोगों की मदद से निकाला गया शव।
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प्रशासनिक रुख: नायब तहसीलदार राजेश सिंह मौके पर पहुंचे; सुरक्षा इंतज़ामों पर उठे गंभीर सवाल।
एक पल की देरी और… “माँ का कलेजा कांप उठा”
मिली जानकारी के अनुसार, 17 वर्षीय छोटी बेलदार किसी कारणवश स्कूल के पीछे स्थित खदान के पास गई थी, जहाँ वह गहरे पानी की चपेट में आकर डूबने लगी।
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तत्काल निर्णय: पास ही मौजूद माँ रेखा बेलदार ने जैसे ही अपनी लाड़ली को डूबते देखा, उन्होंने बिना सोचे-समझे पानी में छलांग लगा दी।
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जीवन और मृत्यु का संघर्ष: पानी के भीतर माँ और बेटी के बीच जिंदगी की जंग चली। माँ ने कड़ी मशक्कत के बाद बेटी को किनारे की ओर सुरक्षित धकेल दिया, लेकिन खुद थक गईं और गहरे पानी से बाहर नहीं निकल सकीं।
प्रशासनिक लापरवाही: “खुले गड्ढे दे रहे मौत को न्योता”
इस हादसे ने एक बार फिर सतना जिले में चल रही अवैध और असुरक्षित खदानों की पोल खोल दी है:
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बैरिकेडिंग का अभाव: हाई स्कूल के ठीक पीछे इतनी बड़ी खदान होने के बावजूद वहाँ न तो कोई फेंसिंग है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड।
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ग्रामीणों का आक्रोश: स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बाद भी प्रशासन ने इन खदानों को पाटने या सुरक्षित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
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गंभीर चेतावनी: नायब तहसीलदार राजेश सिंह ने स्थिति का जायजा लिया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि जब तक इन खदानों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, मासूमों की जान जाती रहेगी।
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बिजली का झटका: 1 अप्रैल से एमपी में बिजली 4.80% महंगी होगी।
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छिंदवाड़ा अपडेट: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिल्ली से सीधे छिंदवाड़ा के पीड़ितों से मिलने पहुँच रहे हैं।
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छुट्टियों का कैलेंडर: एमपी में 1 मई से स्कूलों की छुट्टियाँ शुरू होंगी; नया शेड्यूल जारी।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
जिस बेटी की जान रेखा ने बचाई, वह अपनी माँ को खोने के गम में बदहवास है। गाँव के लोग रेखा के इस साहस और बलिदान को नमन कर रहे हैं, लेकिन साथ ही प्रशासन के खिलाफ गुस्सा भी पनप रहा है कि आखिर कब तक असुरक्षित खदानें ‘काल’ बनती रहेंगी?








