रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव (CS) अमिताभ जैन की राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) के रूप में नियुक्ति ने प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जिस आईएएस अधिकारी को भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए ‘शराब घोटाले’ का अहम किरदार बताया था, अब उसी भाजपा सरकार (साय सरकार) द्वारा उन्हें इस संवैधानिक पद पर बैठाने से कई सवाल उठ रहे हैं।
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शपथ ग्रहण और विरोध की गूँज
सोमवार को अमिताभ जैन ने लोकभवन में दो अन्य सूचना आयुक्तों के साथ पद और गोपनीयता की शपथ ली। लेकिन उनकी नियुक्ति के साथ ही पुराने आरोपों की फाइलें फिर से खुल गई हैं।
विवाद की मुख्य वजह: भाजपा का वो पुराना ‘शिकायती पत्र’
वर्तमान सरकार द्वारा की गई इस नियुक्ति पर शोर इसलिए मच रहा है क्योंकि:
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शराब घोटाले में घेरा था: भाजपा नेता नरेश गुप्ता ने पूर्व में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि 2020 में जब अमिताभ जैन CS बने, उन्हीं के कार्यकाल में शराब घोटाला फला-फूला।
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भूमिका पर सवाल: पत्र में दावा किया गया था कि शराब आपूर्ति करने वाली संस्था (CGSMCL) के अध्यक्ष CS खुद थे, ऐसे में उनकी जानकारी के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं था।
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विरोधाभास: कल तक जिस अधिकारी की जांच की मांग भाजपा कर रही थी, आज उन्हें ही एक पारदर्शी संस्था का प्रमुख बना दिया गया है।
कांग्रेस ने बनाया ‘हथियार’, कहा- साबित हुआ कि घोटाला हुआ ही नहीं
कांग्रेस ने इस नियुक्ति को हाथों-हाथ लिया है। पार्टी प्रवक्ता धनंजय ठाकुर का कहना है कि:
“अगर अमिताभ जैन दागी होते तो भाजपा सरकार उन्हें CIC नहीं बनाती। उनकी नियुक्ति इस बात का प्रमाण है कि शराब घोटाला सिर्फ कांग्रेस सरकार को बदनाम करने का एक राजनैतिक षड्यंत्र था।”
आरटीआई एक्टिविस्ट ने चयन प्रक्रिया को बताया ‘अवैध’
आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे ने इस नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार:
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अमिताभ जैन का इंटरव्यू तब हुआ जब वे खुद मुख्य सचिव (CS) के पद पर आसीन थे।
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आरोप है कि उनके कनिष्ठ (Junior) अधिकारियों ने ही उनका चयन साक्षात्कार लिया, जो सेवा नियमों और पारदर्शिता के विरुद्ध है।
भाजपा का बचाव: “नियम के तहत हुई नियुक्ति”
दूसरी ओर, भाजपा नेता राजीव चक्रवर्ती ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमिताभ जैन की नियुक्ति पूरी तरह से निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत की गई है। इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं है।
निष्कर्ष
अमिताभ जैन की ताजपोशी ने साय सरकार को बचाव की मुद्रा में ला खड़ा किया है। एक तरफ जहां प्रशासनिक गलियारों में उनकी क्षमता की चर्चा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में “शराब घोटाले” की थ्योरी अब भाजपा के गले की हड्डी बनती दिख रही है।








