प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात की 125वीं कड़ी में मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के विचारपुर गांव का नाम लेते हुए यहां के फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी दी। उन्होंने बताया कि जर्मनी के प्रसिद्ध फुटबॉल कोच डायटमार बेयर्सडॉर्फर ने विचारपुर के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने की इच्छा जताई है।

इस पहल के तहत जल्द ही शहडोल के चार युवा खिलाड़ी, दो बालक और दो बालिकाएं, जर्मनी की फुटबॉल अकादमी में प्रशिक्षण के लिए भेजे जाएंगे। उनके साथ एक प्रशिक्षक भी रवाना होंगे।
सरकार उठाएगी पूरा खर्च
मध्यप्रदेश सरकार ने इस अनोखी पहल को तेजी से आगे बढ़ाते हुए निर्णय लिया है कि चयनित खिलाड़ियों और प्रशिक्षक के जर्मनी प्रवास का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अक्टूबर में खिलाड़ियों के नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
पॉडकास्ट ने बनाई राह
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि हाल ही में उन्होंने विश्व प्रसिद्ध पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन से बातचीत के दौरान विचारपुर के फुटबॉल खिलाड़ियों की संघर्षगाथा साझा की थी। इस चर्चा से प्रभावित होकर जर्मनी के कोच ने भारतीय दूतावास से संपर्क साधा और खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव रखा।
गर्व और उत्साह का माहौल
शहडोल के विचारपुर गांव को फुटबॉल के प्रति जुनून के कारण ‘मिनी ब्राजील’ कहा जाता है। यहां की गलियों से निकलने वाले खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना चुके हैं। अब पहली बार उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।सहायक संचालक खेल एवं एनआईएस फुटबॉल कोच रईस अहमद ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में विचारपुर का नाम लिया। उनके इस जिक्र की वजह से यह अवसर हमारे खिलाड़ियों तक पहुंचा है। यह पूरे जिले के लिए सम्मान की बात है।”
क्षेत्र में उमड़ा गर्व
इस घोषणा के बाद पूरे क्षेत्र में उत्साह और गर्व का माहौल है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह अवसर केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे जिले की फुटबॉल संस्कृति को नई पहचान देगा। इससे भविष्य में और भी प्रतिभाएं उभरकर सामने आएंगी और विचारपुर का नाम विश्व फुटबॉल मानचित्र पर दर्ज होगा।
‘मिनी ब्राजील’ से ग्लोबल स्टेज तक
विचारपुर के लोग मानते हैं कि यह सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति का हिस्सा है। गांव के हर गली-मोहल्ले में फुटबॉल की धड़कन सुनाई देती है। अब जब इन खिलाड़ियों को जर्मनी जैसे देश में पेशेवर प्रशिक्षण मिलेगा तो यह केवल उनके करियर को नई दिशा ही नहीं देगा, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश को गौरवान्वित करेगा।







