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बुंदेलखंड में ‘चीता’ युग का आगाज: वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा अफ्रीकन चीतों का तीसरा घर; CM ने किया ‘बोमा’ निर्माण का शुभारंभ

सागर (नौरादेही)। मध्य प्रदेश, जो पहले से ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘चीता स्टेट’ के रूप में विख्यात है, अब अपने तीसरे चीता ...

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| सतना टाइम्स

सागर (नौरादेही)। मध्य प्रदेश, जो पहले से ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘चीता स्टेट’ के रूप में विख्यात है, अब अपने तीसरे चीता प्रोजेक्ट के लिए तैयार है। कूनो और गांधी सागर के बाद अब बुंदेलखंड का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व अफ्रीकी चीतों की रफ्तार का गवाह बनेगा। बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहाँ ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’ (विशेष बाड़ा) के निर्माण का भूमि पूजन कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का श्रीगणेश किया।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • मिशन जून 2026: मई-जून तक दक्षिण अफ्रीका या बोत्सवाना से 4 चीतों के आने की संभावना।

  • सॉफ्ट रिलीज बोमा: चीतों को स्थानीय जलवायु में ढालने के लिए तैयार किया जा रहा है अत्याधुनिक बाड़ा।

  • इको-टूरिज्म को बढ़ावा: चीता प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड में रोजगार और पर्यटन के नए अवसर खुलेंगे।

  • दुर्लभ कछुओं की सौगात: सीएम ने बामनेर नदी में 14 दुर्लभ प्रजाति के कछुए छोड़े।


क्या है ‘सॉफ्ट रिलीज बोमा’? (समझिए तकनीक)

चीतों को सीधे खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाता। इसके लिए ‘सॉफ्ट रिलीज’ प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  1. अनुकूलन (Acclimatization): विदेशी धरती से आए चीतों को पहले एक सीमित और सुरक्षित बाड़े (बोमा) में रखा जाता है।

  2. निगरानी: यहाँ वन्यजीव विशेषज्ञ उनके स्वास्थ्य, शिकार की क्षमता और व्यवहार पर 24 घंटे नजर रखते हैं।

  3. सुरक्षा: इस क्षेत्र को ‘सोलर झटका’ फेंसिंग से सुरक्षित किया जाता है ताकि अन्य शिकारी जानवर भीतर न आ सकें।

नौरादेही ही क्यों? (विशेषज्ञों की राय)

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व का भू-दृश्य दक्षिण अफ्रीका के घास के मैदानों (सवाना) से काफी मिलता-जुलता है।

  • विस्तृत घास के मैदान: चीतों को दौड़ने और शिकार करने के लिए यहाँ लंबे-चौड़े मैदान उपलब्ध हैं।

  • भरपूर शिकार: यहाँ चिंकारा, चीतल और अन्य शाकाहारी जीवों की संख्या पर्याप्त है।

  • प्राकृतिक आवास: यहाँ की नदियाँ (जैसे बामनेर) और पहाड़ चीतों के फलने-फूलने के लिए आदर्श हैं।


सीएम का ‘देसी’ अंदाज और वन्यजीव प्रेम

मुख्यमंत्री ने इस दौरे के दौरान न केवल सरकारी औपचारिकताएं पूरी कीं, बल्कि वे पूरी तरह ‘जननायक’ के रूप में नजर आए:

  • खेत में भोजन: मोहली में सीएम ने एक खेत में खटिया पर बैठकर चूल्हे की दाल-रोटी का लुत्फ उठाया।

  • जंगल सफारी: उन्होंने 10 किमी लंबी सफारी कर वन्यजीवों के संरक्षण का जायजा लिया।

  • कछुआ पुनर्वास: पारिस्थितिकी संतुलन के लिए ‘टेरा प्रिंस’ और ‘सुंदरी’ प्रजाति के 14 कछुओं को नदी में मुक्त किया।


वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व: एक नजर में

विशेषता विवरण
कुल क्षेत्रफल 2,339 वर्ग किमी (एमपी का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व)
विस्तार सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले
बाघों की संख्या लगभग 32 बाघ
अन्य वन्यजीव भेड़िया (Land of Wolves), तेंदुआ, भालू, चिंकारा
पक्षी प्रजातियां 240 से अधिक

“जंगल की असली खूबसूरती वहां के जानवरों से होती है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व जल्द ही चीतों की अठखेलियों का केंद्र बनेगा, जिससे क्षेत्र में इको-टूरिज्म बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।”

डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें