भोपाल। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी की दस्तक के बीच आम आदमी की जेब पर दोहरी मार पड़ने वाली है। बिजली नियामक आयोग ने प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) के राजस्व घाटे को कम करने के लिए बिजली दरों में वृद्धि को मंजूरी दे दी है। हालांकि कंपनियों ने 10.19% की भारी बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन आयोग ने इसे सीमित कर 4.8% पर बरकरार रखा है।

न्यूज़ हेडलाइंस
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महंगी बिजली: 1 अप्रैल से हर यूनिट पर चुकाना होगा ज्यादा दाम; 4.8% की औसत वृद्धि।
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बजट पर असर: मिडिल क्लास परिवार का सालाना खर्च 1,900 से 2,000 रुपये तक बढ़ जाएगा।
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कंपनियों का घाटा: डिस्कॉम्स ने 6,000 करोड़ रुपये के घाटे का दिया था हवाला।
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राहत की बात: ऑनलाइन भुगतान पर छूट और स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को ‘सोलर घंटों’ में 20% की रियायत जारी रहेगी।
आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर? (एक उदाहरण)
यदि आप एक मध्यमवर्गीय परिवार हैं और आपके घर में 1 AC, 1 फ्रिज, 2 पंखे और LED लाइटें हैं, तो असर कुछ इस प्रकार होगा:
नोट: गर्मियों में AC के ज्यादा उपयोग (लगभग 288 यूनिट/महीना) के कारण यह बिल और भी बढ़ सकता है।
नया टैरिफ स्ट्रक्चर: अब कितनी होगी प्रति यूनिट दर?
बढ़ोतरी के बाद अलग-अलग स्लैब के लिए नई दरें (अनुमानित) इस प्रकार होंगी:
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0 से 50 यूनिट तक: ₹4.71 प्रति यूनिट
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51 से 150 यूनिट तक: ₹5.67 प्रति यूनिट
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151 से 300 यूनिट तक: ₹7.05 प्रति यूनिट
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300 यूनिट से ऊपर: ₹7.24 प्रति यूनिट
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(इन दरों के अलावा फिक्स्ड चार्ज भी देय होगा)
कंपनियों ने क्यों बढ़ाई दरें?
बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2026-27 के लिए ₹6,000 करोड़ से अधिक के राजस्व घाटे का अनुमान जताया था। आयोग की जांच के बाद शुद्ध घाटा लगभग ₹2,867 करोड़ आंका गया, जिसकी भरपाई अब उपभोक्ताओं के बिलों के माध्यम से की जाएगी।
उपभोक्ताओं के लिए कुछ राहतें
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स्मार्ट मीटर: स्मार्ट मीटर के लिए अलग से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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सोलर इंसेंटिव: दिन के समय (सोलर घंटों में) बिजली उपयोग करने पर स्मार्ट मीटर वाले ग्राहकों को 20% की छूट मिलती रहेगी।
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डिजिटल पेमेंट: ऑनलाइन और समय पर बिल भरने पर मिलने वाली कैशबैक/डिस्काउंट स्कीम जारी रहेगी।








