मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों को बम से उड़ाने की धमकियों का सिलसिला थम नहीं रहा है। ताजा मामले में जेके यूनिवर्सिटी और अस्पताल (JK University & Hospital) को निशाना बनाया गया है। हालांकि, घंटों चले सघन चेकिंग अभियान के बाद पुलिस को कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। भोपाल में पिछले कुछ दिनों से लगातार मिल रही इन झूठी धमकियों (Hoax Calls/Emails) ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नाक में दम कर रखा है।

ईमेल में ’21 बम’ का दावा
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धमकी का जरिया: जेके अस्पताल और विश्वविद्यालय प्रबंधन को एक अज्ञात ईमेल प्राप्त हुआ।
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खौफनाक दावा: ईमेल भेजने वाले ने दावा किया कि परिसर के भीतर 21 अलग-अलग स्थानों पर विस्फोटक लगाए गए हैं, जिनसे पूरी इमारत को जमींदोज कर दिया जाएगा।
2. डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते की छापेमारी
धमकी मिलते ही संस्थान में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई:
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सर्च ऑपरेशन: भोपाल पुलिस का बम निरोधक दस्ता (BDDS) और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुँचा।
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नतीजा: अस्पताल के वार्डों, क्लासरूम और परिसर के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई, लेकिन कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला। पुलिस ने इसे ‘हॉक्स ईमेल’ (झूठी धमकी) करार दिया है।
भोपाल के अन्य संस्थान भी निशाने पर
जेके यूनिवर्सिटी से पहले भोपाल के कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थान इसी तरह की धमकियों का सामना कर चुके हैं:
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पीपल्स यूनिवर्सिटी और एम्स (AIIMS): यहाँ भी ईमेल के जरिए बम होने का दावा किया गया था।
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नापतौल विभाग: इस सरकारी दफ्तर को तो लगातार दो दिनों तक धमकियाँ मिलीं, जिससे सरकारी काम पूरी तरह ठप रहा और कर्मचारियों में दहशत का माहौल बन गया।
पुलिस की चुनौतियां: ‘तकनीकी गड़बड़ियां’ बन रही बाधा
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के अनुसार:
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साइबर जांच: पुलिस इन ईमेल्स के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रैक कर रही है, लेकिन आरोपी अक्सर वीपीएन (VPN) या विदेशी सर्वर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उन तक पहुँचने में वक्त लग रहा है।
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समय की बर्बादी: हर रोज आ रही इन धमकियों के कारण पुलिस को घंटों सर्च ऑपरेशन चलाना पड़ता है, जिससे पुलिस बल और संसाधनों की भारी बर्बादी हो रही है।
भोपाल बम धमकी: एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| निशाना | जेके यूनिवर्सिटी और जेके अस्पताल, भोपाल |
| धमकी का प्रकार | ईमेल (21 बम होने का दावा) |
| सुरक्षा जांच | डॉग स्क्वायड और बम निरोधक दस्ते द्वारा ‘निल’ रिपोर्ट। |
| पिछली घटनाएं | एम्स, पीपल्स यूनिवर्सिटी, नापतौल विभाग। |
| पुलिस एक्शन | अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज। |








