सिवनी | मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की 15 वर्षीय नौशीन नाज आज भारतीय महिला हॉकी की सबसे उभरती हुई ‘फॉरवर्ड’ खिलाड़ी बनकर उभरी हैं। कभी ₹250 रोज कमाने वाले पिता के पास बेटी के लिए एक नई हॉकी स्टिक खरीदने तक के पैसे नहीं थे, लेकिन आज वही बेटी 29 मई से जापान में होने वाले अंडर-18 एशिया कप के लिए भारतीय टीम में जगह पक्की करने की दहलीज पर खड़ी है।
मुख्य बिंदु
-
हौसले की उड़ान: किराए की झोपड़ी और फेंकी हुई टूटी हॉकी स्टिक को कपड़े से बांधकर नौशीन ने अभ्यास शुरू किया था।
-
नेशनल चैंपियन: बिहार के राजगीर में हुई 16वीं सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में नौशीन ने 9 गोल दागकर टॉप स्कोरर का खिताब जीता।
-
समाज को जवाब: पिता अहफाज खान ने खेल के कपड़ों (Shorts) को लेकर समाज के विरोध के बावजूद अपनी बेटी का हाथ कभी नहीं छोड़ा।
-
एकेडमी का साथ: 2023 में एमपी हॉकी एकेडमी में चयन होने के बाद नौशीन को सही ट्रेनिंग और डाइट मिलना शुरू हुई।
पिता का संघर्ष: “टूटी स्टिक को कपड़े से बांधा पर रुकने नहीं दिया”
48 वर्षीय अहफाज खान मजदूरी कर सात बच्चों का पेट पालते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए बताया:
“मैंने किसी से उधार लेकर एक पुरानी टूटी स्टिक दी थी। नौशीन ने बिना किसी शिकायत के उसे कपड़े से बांधा और खेलना जारी रखा। आज जब वह प्लेयर ऑफ द मैच बनती है, तो मेरी आंखों में खुशी के आंसू आ जाते हैं।”
मैदान पर नौशीन का ‘मैजिक’
नौशीन नाज की रफ्तार और गोल करने की क्षमता ने चयनकर्ताओं को हैरान कर दिया है। राजगीर में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। नौशीन की छोटी बहन सबारिका भी अपनी बहन के नक्शेकदम पर चलते हुए एकेडमी में शामिल हो गई है।
अगला लक्ष्य: नीली जर्सी और एशिया कप
नौशीन का केवल एक ही सपना है— देश के लिए खेलना और अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालना। वह कहती हैं, “हमने सबसे बड़ी रुकावट (गरीबी और अभाव) पार कर ली है। अब मेरा पूरा ध्यान फॉर्म बरकरार रखने और एशिया कप में देश को गोल्ड जिताने पर है।”
कहानी का सारांश
-
खिलाड़ी: नौशीन नाज (15 वर्ष), फॉरवर्ड।
-
निवासी: सिवनी, मध्य प्रदेश।
-
उपलब्धि: 16वीं सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप की टॉप स्कोरर।
-
आगामी लक्ष्य: अंडर-18 एशिया कप (जापान)।









