अक्सर पेरेंट्स सोचते हैं कि बच्चे देर से सोएं तो कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन पेरेंटिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों की ब्रेन ग्रोथ और हेल्दी लाइफस्टाइल सीधे उनकी नींद से जुड़ी है।

पेरेंटिंग एक्सपर्ट बताती हैं कि नींद सिर्फ थकान मिटाने का जरिया नहीं है, बल्कि ये बच्चों की ब्रेन डेवलपमेंट, याददाश्त और लर्निंग कैपेसिटी को मजबूत बनाने का सबसे जरूरी फैक्टर है।
सबसे हेल्दी स्लीप टाइम
श्वेता के मुताबिक बच्चों के लिए परफेक्ट स्लीप रूटीन है – रात 9 बजे से सुबह 7 बजे तक।इस दौरान शरीर में नेचुरल स्लीप हार्मोन रिलीज होते हैं, जो नींद की क्वालिटी बेहतर करते हैं। पूरी नींद लेने से बच्चे दिनभर सीखी चीजों को दिमाग में अच्छे से स्टोर कर पाते हैं।
इसे भी पढ़े : Karishma Kapoor का खुलासा :कभी झाड़ियों के पीछे बदलने पड़ते थे कपड़े, वॉशरूम जाना भी बन जाता था मज़ाक
देर से सोने के नुकसान
- 10 बजे सोना – मेमोरी प्रोसेसिंग स्लो हो जाती है, ग्रोथ हार्मोन कट शॉर्ट हो जाता है।
- 11 बजे सोना – ब्रेन में कैओस शुरू होता है। दिमाग एक्स्ट्रा जानकारी क्लीन नहीं कर पाता, जिससे कंसंट्रेशन और लर्निंग एबिलिटी घट जाती है।
- 12 बजे सोना – सबसे नुकसानदायक। नींद पूरी नहीं होती, पढ़ाई पर ध्यान नहीं रहता, मूड स्विंग्स बढ़ते हैं और कम उम्र में ही प्यूबर्टी आने का खतरा बढ़ जाता है।
पेरेंट्स के लिए अलर्ट
एक्सपर्ट मानती हैं कि बच्चे तभी हेल्दी स्लीप रूटीन फॉलो करेंगे, जब उनके पेरेंट्स भी समय पर सोएं। अच्छी स्लीप हैबिट्स न सिर्फ दिमाग को तेज बनाती हैं बल्कि मूड, हेल्थ और पढ़ाई सबको बैलेंस करती हैं।







