इंदौर (मध्य प्रदेश): देश के चर्चित व्यापमं घोटाले से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इंदौर की विशेष अदालत ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने वर्ष 2011 की पीएमटी (PMT) भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2011 का है, जब मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित प्री-मेडिकल टेस्ट (PMT) में बड़े स्तर पर धांधली हुई थी। इस संगठित फर्जीवाड़े में वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह ‘सॉल्वर’ यानी फर्जी परीक्षार्थियों को बिठाया गया था।
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फर्जीवाड़ा: मूल अभ्यर्थियों ने मोटी रकम देकर बिचौलियों के जरिए फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल कराया।
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गठजोड़: सजा पाने वालों में वे अभ्यर्थी भी शामिल हैं जिनके नाम पर फॉर्म भरे गए थे, वे फर्जी परीक्षार्थी जो परीक्षा में बैठे और वे बिचौलिये जिन्होंने यह पूरी सेटिंग करवाई थी।
अदालत की सख्त टिप्पणी
विशेष न्यायाधीश शुभ्रा सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी 12 आरोपियों को दोषी पाया। कोर्ट ने कहा कि यह अपराध न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उन योग्य और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ भी गंभीर अन्याय है, जो मेहनत के दम पर डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं।
दोषियों का प्रोफाइल
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सजा: सभी दोषियों को 5-5 साल की कैद और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
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स्थान: सजा पाने वाले दोषियों में 4 आरोपी मध्य प्रदेश के निवासी हैं, जबकि अन्य 8 आरोपी उत्तर प्रदेश (UP) के रहने वाले हैं।
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अन्य: इस मामले में शामिल एक आरोपी नाबालिग है, जिसका मामला पृथक रूप से सुना जा रहा है।
जेल भेजे गए सभी दोषी
अदालत के फैसले के तुरंत बाद सभी 12 दोषियों को पुलिस कस्टडी में लेकर इंदौर की केंद्रीय जेल भेज दिया गया। व्यापमं घोटाले में एक साथ इतने लोगों को सजा सुनाए जाने से भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोहों के बीच हड़कंप मच गया है।








