सतना, मध्य प्रदेश: बदलते दौर के साथ जहाँ पुरानी तकनीकें कबाड़ में बदलकर अपना अस्तित्व खो रही हैं, वहीं सतना के विद्युत विभाग ने एक अनोखी पहल करते हुए ‘कबाड़’ को ‘कमाल’ में बदल दिया है। यहाँ पुराने पावर हाउस स्थित विद्युत कार्यालय अब बिजली मीटरों के एक अनूठे ‘म्यूजियम’ में तब्दील हो गया है, जहाँ 1990 से लेकर 2025 तक के मीटरों के विकास का पूरा इतिहास एक ही जगह पर देखा जा सकता है।
1990 के ‘डायल’ मीटर से ‘स्मार्ट’ युग तक का विकास
इस संग्रह की प्रेरणा कार्यपालन अभियंता (शहर) नीलाभ श्रीवास्तव को स्टोर रूम में स्क्रैप (कबाड़) में पड़े पुराने और चलन से बाहर हो चुके मीटरों को देखकर मिली।
“हम स्टोर में देखते थे कि पुराने मीटर स्क्रैब में आते हैं और उनको स्टोर में रखा जाता था। हमें इसी से प्रेरणा मिली कि हम लोग इस तरह का एक मॉडल बनाएं जिसमें मीटर का एवोल्यूशन (विकास) किस तरह हुआ है।” – नीलाभ श्रीवास्तव (कार्यपालन अभियंता, शहर)
दफ्तर के बाहर एक चैम्बर में इन मीटरों को ‘फ्लो-चार्ट’ के रूप में करीने से सजाया गया है। इस संग्रह में मुख्य रूप से:
- 1990 का सितारा: डायल आधारित इलेक्ट्रो मैकेनिकल इंडक्शन मीटर, जो कभी साल 2000 तक घरों की पहचान हुआ करता था।
- आज के आधुनिक ‘स्मार्ट’ डिजिटल मीटर तक।
इस मॉडल में कुल 9 अलग-अलग प्रकार के (सिंगल और डबल फेस) मीटर शामिल हैं। यह संग्रह दिखाता है कि कैसे भारी-भरकम डायल वाले मीटर धीरे-धीरे डिजिटल और अब ‘स्मार्ट’ हो गए हैं।
जागरूकता का केंद्र बना म्यूजियम
श्री श्रीवास्तव के अनुसार, यह संग्रह केवल एक म्यूजियम पीस नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक करने का एक बेहतरीन माध्यम भी है।
- यहाँ आने वाले लोगों को मीटरों का दिलचस्प इतिहास देखने के साथ-साथ यह भी समझाया जाता है कि नए स्मार्ट मीटर कैसे काम करते हैं।
- उपभोक्ताओं को ‘स्मार्ट बिजली एप्लिकेशन’ के बारे में भी जानकारी दी जाती है, जिससे वे खुद अपनी बिजली की खपत पर बारीकी से नजर रख सकते हैं।
इस अनूठे प्रयास के माध्यम से, सतना विद्युत विभाग ने न केवल पुरानी तकनीक को सम्मान दिया है, बल्कि बदलते समय के साथ उपभोक्ताओं को आधुनिक तकनीकों से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया है।








