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सतना का चमत्कारी मंदिर, यहां दिन में 3 बार बदलते हैं मां कालिका के रूप,प्रतिमा से आ चुका है पसीना

Satna Temple News :नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। ऐसे में मध्य प्रदेश (madhyapradesh) के सतना (satna) जिले में ...

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| सतना टाइम्स

Bhatanwara maa kalka temple

Satna Temple News :नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। ऐसे में मध्य प्रदेश (madhyapradesh) के सतना (satna) जिले में एक ऐसा प्राचीन और चमत्कारी मंदिर है, जिसके चमत्कार सुनकर हर कोई हैरान हो जाता है। जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर अमरपाटन मार्ग पर स्थित भटनवारा(bhatanwara) गांव का यह मां कालिका मंदिर भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहाँ न केवल देवी के स्वरूप की अद्भुत झलक मिलती है, बल्कि कई ऐसे अलौकिक घटनाक्रम भी घटित हुए हैं, जिन्होंने भक्तों की आस्था को और गहरा कर दिया है।

Bhatanwara maa kalka temple

दिन में तीन बार बदलते हैं मां के भाव

मंदिर के पुजारी प्रभात शुक्ला बताते हैं कि इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि माता की प्रतिमा दिन में तीन बार अपने रूप और भाव बदलती है। सुबह, दोपहर और शाम को माता के चेहरे पर अलग-अलग भाव देखने को मिलते हैं। मान्यता यह है कि जैसे-जैसे सूर्य आकाश में अपनी दिशा बदलता है, वैसे-वैसे माता के स्वरूप में तेज और भाव भी परिवर्तित होते हैं।सुबह माता का स्वरूप शांत और सौम्य नजर आता है, दोपहर को उनका चेहरा इतना तेजस्वी हो जाता है कि कोई भक्त उन्हें ज्यादा देर तक देख भी नहीं पाता, वहीं शाम को माता का भाव करुणा और ममता से भरा हुआ प्रतीत होता है।

आंखों का तेज और दिव्य रहस्य

पुजारी बताते हैं कि माता की प्रतिमा की आंखें भी सूर्य की दिशा के साथ बदलती हुई प्रतीत होती हैं। दोपहर के समय जब सूर्य अपने शिखर पर होता है, तो देवी की आंखों से ऐसा प्रकाश और तेज निकलता है कि लोग नज़रें मिलाने में असमर्थ हो जाते हैं।

1974 में प्रतिमा से जब प्रतिमा से निकला पसीना

यह मंदिर केवल मान्यताओं का प्रतीक नहीं, बल्कि कई बार यहां हुए चमत्कारों ने भक्तों को हैरत में डाल दिया है।पुजारी प्रभात शुक्ला पूर्वजों से सुने चमत्कारों का जिक्र करते हुए बताते हैं कि यह केवल किंवदंती नहीं, बल्कि सच्चाई है। उन्होंने बताया कि सन 1974 में एक अद्भुत घटना हुई थी, जब प्रतिमा से अपने आप पसीना निकलने लगा था। इसी तरह, 12 अप्रैल 2004 को मंदिर में आयोजित एक भंडारे में किसी त्रुटि के कारण माता की प्रतिमा का सिर हिलने लगा था। जब गलती का अहसास हुआ और उसे सुधारा गया, तब जाकर प्रतिमा शांत हुई।

700 साल से भी पुराना इतिहास

इतिहासकारों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर लगभग 700 से 800 साल पुराना है। इसकी जड़ें मौर्य काल तक जुड़ी बताई जाती हैं।भटनवारा कभी परिहार राजवंश की रियासत का हिस्सा हुआ करता था। किंवदंती है कि यह प्रतिमा पहले पास की करारी नदी के किनारे मिली थी, लेकिन कुछ चोर और डाकू इसे चोरी करके ले गए। आश्चर्यजनक रूप से वे इसे ज्यादा दूर नहीं ले जा सके और रास्ते में ही इसे छोड़कर भाग गए। बाद में माता ने एक भक्त को स्वप्न में दर्शन दिए और राजा ने यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया।

भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी

मां कालिका के इस मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु सत्यनारायण और शिखा विश्वकर्मा ने बताया कि हर दिन नवरात्रि में माता के दर्शन करने आते हैं। यहां आकर हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। मैंने खुद अनुभव किया है कि मां के दरबार में मांगी गई हर प्रार्थना पूर्ण होती है।नवरात्रि के अवसर पर यहां दूर-दराज से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर परिसर भक्ति गीतों, घंटियों की गूंज और “जय माता दी” के जयकारों से गूंज रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Satnatimes.In किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

पिछले पाँच वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय जयदेव विश्वकर्मा, जनसरोकार और जमीनी हकीकत की आवाज़ हैं। सामाजिक सरोकार, सकारात्मक पहल, राजनीति, स्वास्थ्य और आमजन से जुड़े मुद्दों पर इनकी पकड़ गहरी है। निष्पक्षता और सटीक ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले जयदेव, जनता के असली सवालों को सामने लाने में यक़ीन रखते हैं।... और पढ़ें