सतना (लगरगवां)। सतना जिले के उंचेहरा तहसील अंतर्गत ग्राम लगरगवां में भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने 2 एकड़ सरकारी जमीन को ही अपनी जागीर समझ लिया। हद तो तब हो गई जब दबंग ने न केवल इस जमीन पर गेहूं की फसल उगाई, बल्कि अब हार्वेस्टर लगाकर उसकी कटाई भी कर ली। कलेक्टर जनसुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन तक गुहार लगाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने रहे।

न्यूज़ हेडलाइंस
-
दबंगई का आलम: खसरा नंबर 390 की 0.627 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर राजवेंद्र सिंह परिहार का अवैध कब्जा।
-
बौना साबित हुआ कानून: तहसीलदार द्वारा जुलाई 2025 में बेदखली का नोटिस देने के बावजूद नहीं हुई कोई कार्रवाई।
-
सिस्टम फेल: 3 बार कलेक्टर जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत, फिर भी अधिकारी बने रहे अनजान।
-
मौके की स्थिति: हार्वेस्टर से आधी फसल काटी जा चुकी है और ट्रैक्टर से खेत की जुताई कर सबूत मिटाने की तैयारी है।
जुलाई में जारी हुआ था नोटिस, फिर भी ‘साहब’ सोए रहे
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, उंचेहरा तहसीलदार न्यायालय ने 18 जुलाई 2025 को ही आरोपी राजवेंद्र सिंह (राजा सिंह) परिहार के खिलाफ धारा 248 के तहत बेदखली और अर्थदंड का नोटिस जारी किया था।
-
मूकदर्शक प्रशासन: नोटिस जारी होने के बाद पटवारी की रिपोर्ट भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
-
मिलीभगत का शक: ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच, पुलिस और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही दबंग ने बेखौफ होकर पूरी फसल काट ली।
कलेक्टर की जनसुनवाई को भी ठेंगा
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीणों ने एक-दो बार नहीं, बल्कि तीन बार कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई। इसके बावजूद धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं या आँखें मूँद लें, तो सरकारी संपत्तियों की रक्षा भगवान भरोसे ही है।
अगला कदम क्या?
फसल कटने के बाद अब आरोपी खेत की जुताई कर रहा है ताकि अगले सीजन के लिए फिर से जमीन कब्जाई जा सके। ग्रामीणों ने अब संभागायुक्त (कमिश्नर) से हस्तक्षेप की मांग की है। यदि अब भी एक्शन नहीं लिया गया, तो सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की यह परिपाटी पूरे जिले में खतरनाक रूप ले सकती है।
खबर का सारांश
-
स्थान: ग्राम लगरगवां, तहसील उंचेहरा (सतना)।
-
आरोपी: राजवेंद्र सिंह परिहार (राजा सिंह)।
-
अतिक्रमण: 2 एकड़ शासकीय भूमि (खसरा नंबर 390)।
-
विफलता: बेदखली आदेश के बावजूद कार्रवाई न होना।








