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REWA NEWS : विकास की नई राह! रीवा डबल-ट्यूब टनल का 70% से अधिक काम पूरा, 2025 में खुलेगी विंध्य की ‘लाइफलाइन’

प्रदेश की सबसे लंबी डबल-ट्यूब सुरंग तैयार, बुंदेलखंड और विंध्य के लिए खुलेगा सुगम मार्ग रीवा, मध्य प्रदेश: विंध्य क्षेत्र के लिए ...

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| सतना टाइम्स

प्रदेश की सबसे लंबी डबल-ट्यूब सुरंग तैयार, बुंदेलखंड और विंध्य के लिए खुलेगा सुगम मार्ग

रीवा, मध्य प्रदेश: विंध्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर मानी जा रही रीवा टनल परियोजना का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदेश की सबसे लंबी डबल-ट्यूब टनल (लगभग 1.5 किमी प्रत्येक) का 70 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य अगले कुछ महीनों में पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण परियोजना 2025 की शुरुआत तक आम जनता के लिए खोल दी जाएगी। यह परियोजना NH-135B (रीवा बाइपास फोरलेन) का एक मुख्य हिस्सा है, जो पहाड़ी काटकर अत्याधुनिक तकनीक से तैयार की जा रही है।

रीवा को जाम से मिलेगी बड़ी राहत

इस सुरंग के बन जाने से रीवा शहर को सबसे बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में सतना, सीधी, मिर्जापुर और प्रयागराज की ओर जाने वाले भारी वाहनों को शहर के बीच से गुजरना पड़ता है, जिससे शहर में भयंकर ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। टनल के माध्यम से यह यातायात सीधे बाइपास मार्ग से गुजरेगा। स्थानीय व्यापारी संघ के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा, “टनल बनने के बाद रीवा शहर का चेहरा बदल जाएगा। जहाँ पहले ट्रक और बसों की भीड़ रहती थी, वहाँ अब सुगम यातायात और स्वच्छ वातावरण मिलेगा।”

आधुनिक तकनीक: NATM का उपयोग

परियोजना के निर्माण में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग किया जा रहा है, जिसे जम्मू-कश्मीर की चिनाब रेल परियोजना और हिमालयन टनल्स में भी अपनाया गया है। मुख्य अभियंता विजय दुबे के अनुसार, “टनल के भीतर सड़क बिछाने और सुरक्षा प्रणाली लगाने का काम तेजी से चल रहा है।”

सुरक्षा और आधुनिक फीचर्स:

  • टनल के दोनों सिरों पर अत्याधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम
  • सीसीटीवी निगरानी और फायर सेफ्टी सिस्टम
  • इमरजेंसी गेट और निकास मार्ग

रोजगार और स्थानीय विकास को मिली रफ्तार

इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिला है। करीब 400 से अधिक मजदूर, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ सीधे तौर पर इस निर्माण कार्य से जुड़े हैं। रीवा निवासी अरविंद मिश्रा ने बताया, “पहले यह इलाका सुनसान था, अब चारों ओर मशीनें, मजदूर और इंजीनियर काम कर रहे हैं। गाँव के कई युवाओं को रोजगार मिला है।”

भूगर्भीय चुनौतियाँ और सुरक्षा उपाय

पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण के दौरान कई बार चट्टानों के ढीले होने जैसी भूगर्भीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इंजीनियरों ने इसके लिए सपोर्टिंग वॉल्स और स्टील शॉटक्रिट तकनीक का प्रयोग किया। अधिकारियों ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए टनल के दोनों ओर हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना भी बनाई है, ताकि पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके।

विंध्य के लिए विकास का द्वार

यह सुरंग विंध्य और बुंदेलखंड के बीच संपर्क को आसान बनाएगी। इससे न केवल रीवा से सतना और प्रयागराज की दूरी समय के लिहाज से घटेगी, बल्कि माल परिवहन भी सुगम होगा। रीवा के सांसद ने कहा, “यह सिर्फ एक सुरंग नहीं, बल्कि विंध्य क्षेत्र के लिए विकास का द्वार है। आने वाले समय में रीवा मध्य भारत का एक प्रमुख औद्योगिक और ट्रांजिट हब बनेगा।”


 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें