BJYM President Shyam Tailor :क्या किसी नेता का स्वागत शहर की सांसे रोक देने की कीमत पर होना चाहिए? यह सवाल आज सतना का हर वह नागरिक पूछ रहा है जो घंटों जाम में फंसा रहा, जिसकी ट्रेन छूट गई या जो एंबुलेंस में जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के स्वागत में आज सतना शहर की सड़कों पर जो हुआ, वह ‘स्वागत’ कम और जनता के लिए ‘सजा’ ज्यादा लग रहा था।

पूरा शहर घंटों तक बंधक बना रहा, गाड़ियां चींटी की चाल रेंगती रहीं और सतना पुलिस… वह तो शायद ‘सत्ता के रसूख’ के आगे नतमस्तक होकर तमाशबीन बनी रही।
हेलमेट पर ‘शेर’, रसूखदारों के आगे ‘ढेर’
सतना पुलिस की कार्यशैली पर आज सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। यही पुलिस आम दिनों में एक गरीब आदमी को हेलमेट न लगाने पर बीच चौराहे पर रोक लेती है, गाड़ी के कागज न होने पर चालान फाड़ देती है और तीन सवारी पर डंडे बरसाती है। लेकिन आज जब सत्ता पक्ष का काफिला निकला, तो सारे नियम-कायदे हवा हो गए।सड़क पर नेता जी का स्वागत होता रहा, यातायात के नियम टूटते रहे, लेकिन खाकी वर्दी वालों की हिम्मत नहीं हुई कि वे ‘माननीयों’ को रोक सकें। ऐसा लगा मानो यातायात के नियम सिर्फ आम जनता को प्रताड़ित करने के लिए हैं, सत्ताधीशों के लिए तो ‘ग्रीन कॉरिडोर’ हमेशा खुला है।
एंबुलेंस के हूटर दब गए शोर में
स्वागत रैली का यह शोर इतना तेज था कि इसमें इंसानियत की आवाज भी दब गई। जाम में कई एंबुलेंस फंसी रहीं, हूटर बजते रहे, लेकिन उन्हें रास्ता देने वाला कोई नहीं था। सोचिए, उस मरीज के परिवार पर क्या बीती होगी?जाम इतना भयानक था कि कई यात्री समय पर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड नहीं पहुंच सके।
रेंगता रहा शहर
ऑफिस से निकले कर्मचारी और जरूरी काम से निकले लोग—सब के सब इस ‘शक्ति प्रदर्शन’ का शिकार बने। लोग अपने ही शहर में अपने ही घर पहुंचने के लिए तरस गए।
स्वागत या शक्ति प्रदर्शन?
आज की तस्वीर ने साफ कर दिया है कि सतना में ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘चेहरे का राज’ चलता है। अगर आप सत्ता के साथ हैं, तो सड़क आपकी है, नियम आपके हैं और पुलिस आपकी सुरक्षा में है। और अगर आप आम आदमी हैं, तो जाम में फंसिए, चालान भरिए और चुप रहिए।







