सतना जिले के भटनवारा गांव में स्थित माता कालिका का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए न केवल आस्था, बल्कि आश्चर्य का भी केंद्र है। यहाँ माँ कालिका की 700 साल पुरानी अद्भुत प्रतिमा विराजमान है, जिसकी आँखों और चेहरे के स्वरूप में होने वाले बदलाव को भक्त साक्षात चमत्कार मानते हैं। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहाँ की प्रतिमा जीवंत है और समय के साथ अपनी भंगिमाएं बदलती है।

सूर्य की दिशा में घूमती आँखें
भटनवारा के इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता माता की आँखें हैं:
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सूर्य से जुड़ाव: जैसे-जैसे सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ता है, माता की प्रतिमा की आँखें भी उसी दिशा में घूमती प्रतीत होती हैं।
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बढ़ता तेज: दोपहर में जैसे-जैसे सूर्य का ताप बढ़ता है, माँ कालिका की प्रतिमा का तेज इतना प्रबल हो जाता है कि कोई भी भक्त उनकी आँखों में सीधे नहीं देख पाता।
दिन में तीन बार बदलता चेहरा
स्थानीय भक्तों और पुजारियों के अनुसार, माता की प्रतिमा दिन भर में तीन अलग-अलग स्वरूपों में दिखाई देती है:
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सुबह, दोपहर और शाम को माता के चेहरे के भाव (Expressions) बदल जाते हैं। कभी वे सौम्य नजर आती हैं, तो कभी उनका रौद्र रूप दिखाई देता है।
700 साल पुराना इतिहास
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मौर्यकालीन प्रभाव: माना जाता है कि यह प्रतिमा मौर्य काल की है और लगभग 700 वर्ष पुरानी है।
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राजा मनह सिंह की कथा: कहा जाता है कि राजा मनह सिंह को यह प्रतिमा करारी नदी के किनारे मिली थी।
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चोरी की कोशिश: लोककथाओं के अनुसार, एक बार चोरों ने इस कीमती प्रतिमा को चुराने का प्रयास किया था, लेकिन वे उसे गाँव की सीमा से बाहर नहीं ले जा सके। अंत में माता ने एक भक्त को सपने में दर्शन दिए, जिसके बाद वर्तमान स्थान पर उनकी स्थापना की गई।
कहाँ स्थित है यह मंदिर
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यह मंदिर सतना जिला मुख्यालय से मात्र 13 किमी दूर अमरपाटन मार्ग पर स्थित भटनवारा गाँव में है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल मेले जैसा माहौल रहता है।
मंदिर का सारांश
| विवरण | जानकारी |
| नाम | माता कालिका मंदिर, भटनवारा |
| स्थान | अमरपाटन रोड, सतना (मध्य प्रदेश) |
| चमत्कार | सूर्य की दिशा में आँखों का घूमना और चेहरे का बदलना। |
| प्रतिमा की आयु | लगभग 700 वर्ष |
| विशेष समय | चैत्र नवरात्रि और नवदुर्गा उत्सव |








