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भूमि घोटाला: ‘गरीब आदिवासियों के नाम पर खरीदी 1135 एकड़ जमीन’,बीजेपी विधायक संजय पाठक के खिलाफ उग्र प्रदर्शन; जमीन वाले 4 आदिवासी कर्मचारी रहस्यमय ढंग से लापता

कटनी (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के कटनी में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री संजय सत्येंद्र पाठक एक बड़े भूमि घोटाले के आरोपों ...

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| सतना टाइम्स

कटनी (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के कटनी में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री संजय सत्येंद्र पाठक एक बड़े भूमि घोटाले के आरोपों में घिर गए हैं। डिंडौरी जिले में 1135 एकड़ जमीन की खरीद और इस मामले से जुड़े चार आदिवासी कर्मचारियों के रहस्यमय ढंग से लापता होने का आरोप लगाते हुए बुधवार को आदिवासी कांग्रेस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की पुलिस से तीखी झड़प भी हुई।

क्या है पूरा आरोप?

विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाए हैं:

  • बेनामी संपत्ति: विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक ने अपने चार आदिवासी कर्मचारियों—नत्थू कोल, प्रहलाद कोल, राकेश सिंह गौड़ और रघुराज सिंह गौड़—के नाम पर डिंडौरी जिले में करीब 1135 एकड़ जमीन खरीदी है।

  • मोहरा बनाने का आरोप: शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये गरीब आदिवासी कर्मचारी महज ‘मोहरा’ हैं और यह पाठक द्वारा किया गया बेनामी संपत्ति का बड़ा खेल है।

जमीन वाले चारों आदिवासी लापता, जान को खतरा

प्रदर्शनकारियों ने सबसे गंभीर चिंता उन चार आदिवासियों की सुरक्षा को लेकर जताई जिनके नाम पर जमीनें दर्ज हैं।

  • लापता: उनका आरोप है कि घोटाले की शिकायत होने के बाद से ही ये चारों कर्मचारी अपने घरों से लापता हैं।

  • पुलिस पर आरोप: दिव्यांशु मिश्रा ने कहा कि उन्होंने एसपी को लिखित में शिकायत दी थी कि इन आदिवासियों की जान को खतरा है, लेकिन पुलिस ने आज तक न तो कोई कार्रवाई की, न उनके बयान दर्ज किए और न ही उनकी सुध ली।

मामला राष्ट्रीय आदिवासी आयोग तक पहुंचा

यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है और राष्ट्रीय आदिवासी आयोग ने इसे गंभीरता से लिया है:

  • नोटिस जारी: आयोग ने 15 सितंबर को ही नोटिस जारी कर कटनी, जबलपुर, डिंडौरी, उमरिया और सिवनी के कलेक्टरों से जवाब मांगा था।

  • सवाल: आयोग ने पूछा है कि इन साधारण आदिवासियों के नाम पर इतनी बेशकीमती जमीन कैसे और कब आई?

  • प्रशासन की चुप्पी: हालांकि, आरोप है कि कलेक्टरों ने अभी तक आयोग को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया है।

प्रदर्शनकारियों ने डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि इन चारों आदिवासियों के बैंक खातों के पिछले 25 सालों के लेन-देन की जांच की जाए, जिससे सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल, कटनी कलेक्टर का कहना है कि मामले से जुड़ी जानकारी एकत्रित की जा रही है I

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें