इंदौर (मध्य प्रदेश):प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इंदौर की एक विशेष अदालत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अवैध ‘डिब्बा ट्रेडिंग’ और ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के खिलाफ चार्जशीट (अभियोजन शिकायत) दाखिल की है। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने आपराधिक साजिश और तकनीक में हेरफेर कर 404.46 करोड़ रुपये की काली कमाई की है। इंदौर, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई और दुबई तक फैले इस नेटवर्क ने मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया था।
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विशाल अग्निहोत्री है मास्टरमाइंड
ईडी की जांच में विशाल अग्निहोत्री की पहचान इस पूरे अवैध तंत्र के मुख्य संचालक के रूप में की गई है। इसके साथ ही तरुण श्रीवास्तव, श्रीनिवासन रामासामी, धवल देवराज जैन, धर्मेश रजनीकांत त्रिवेदी और निधि चंदनानी के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। यह सिंडिकेट व्हाइट लेबल एप्लिकेशन और अवैध ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठग रहा था।
छापेमारी में मिला ‘कुबेर का खजाना’
सिंडिकेट के ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान ईडी को भारी मात्रा में नकदी और लग्जरी सामान मिला है:
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नकदी: 5.21 करोड़ रुपये कैश।
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लग्जरी घड़ियां: 4.77 करोड़ रुपये की ब्रांडेड घड़ियां।
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जूलरी और सोना: 1.94 करोड़ रुपये के गहने, 100 ग्राम सोने की सिल्ली और 60 किलो चांदी।
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डिजिटल असेट्स: 41 लाख रुपये से ज्यादा की क्रिप्टोकरेंसी ‘फ्रीज’ की गई है।
34 करोड़ की संपत्ति कुर्क
काली कमाई को खपाने के लिए खरीदे गए अचल संपत्तियों पर भी ईडी ने शिकंजा कसा है। अब तक 34.26 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) की जा चुकी है। इसमें 28.60 करोड़ की अचल संपत्ति (जमीन-मकान) और बैंक खातों में जमा 1.83 करोड़ रुपये शामिल हैं।
तकनीकी हेरफेर से दिया धोखा
ईडी के अनुसार, यह सिंडिकेट ‘व्हाइट लेबल एप्लिकेशन’ का इस्तेमाल करता था। ये ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जिन्हें बिना किसी लाइसेंस के दूसरे ब्रांड के नाम पर बेच दिया जाता है। इसके जरिए अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटें चलाई जा रही थीं और सीमाओं के पार (Cross Border) धनशोधन (Money Laundering) किया जा रहा था।








