Rupee Vs Dollar :सोमवार (30 सितंबर) को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे मजबूत होकर खुला। स्थानीय मुद्रा 88.6975 पर खुली, जो पिछले बंद भाव 88.7612 से बेहतर रही। यह मजबूती ऐसे समय में आई है जब ज्यादातर एशियाई करेंसीज़ शुरुआती कारोबार में दबाव में रहीं और बाजार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

एशियाई करेंसीज़ पर दबाव
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण कोरियाई वोन 0.18%, थाई बाट 0.15%, इंडोनेशियाई रुपिया और सिंगापुर डॉलर 0.08%, जबकि चीनी रेनमिनबी और जापानी येन 0.04% टूटे।
आरबीआई की पॉलिसी पर टिकी नज़र
विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर की मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई ब्याज दरों को यथावत रख सकता है। अर्थशास्त्रियों और फंड मैनेजरों के सर्वे में भी यही संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक पहली तिमाही में तेज़ विकास दर से आरबीआई को राहत मिली है, लेकिन जीएसटी सुधारों के असर का आकलन अभी बाकी है।
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने कहा, “फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में दरें घटा सकता है, जबकि आरबीआई से स्थिर रुख की उम्मीद है। इस अंतर से रुपये को सपोर्ट मिल सकता है।”
एफपीआई और विदेशी दबाव
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने बताया, “एफपीआई लगातार शेयर बाजारों में बिकवाली कर रहे हैं और जब भी रुपया मज़बूत होता है, ये फ्लो उसे नीचे खींच लेते हैं। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी कोई नई प्रगति नहीं हुई है, इसलिए बाजार बुधवार को आरबीआई के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।”
ट्रंप का ‘टैरिफ कार्ड’
इस बीच अमेरिका से भी वैश्विक बाजार को झटका लगा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा टैरिफ लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में फर्नीचर न बनाने वाले देशों पर भारी ड्यूटी लगाई जाएगी और अमेरिका के बाहर बनी हर फिल्म पर 100% टैक्स लगाया जाएगा। हालांकि, इन टैरिफ का तरीका और दरें साफ नहीं हैं।
आगे क्या देखना ज़रूरी होगा
- आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति का बुधवार को आने वाला फैसला।
- विदेशी निवेशकों (एफपीआई) की चाल और शेयर बाजार का रुख।
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नई खबरें।
- वैश्विक स्तर पर ट्रंप की टैरिफ नीति का असर।
संक्षेप में, रुपये को फिलहाल आरबीआई की पॉलिसी, विदेशी निवेश और वैश्विक व्यापारिक माहौल ही दिशा देंगे। बुधवार को आने वाला आरबीआई का बयान रुपये की अगली चाल तय करेगा।







