जबलपुर (मध्य प्रदेश):बिजली बिल जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब केवल बिजली कटना ही चिंता की बात नहीं है। जबलपुर में विद्युत विभाग ने ‘तहसीलदार’ के अधिकारों का प्रयोग करते हुए बड़े बकायेदारों की आर्थिक घेराबंदी शुरू कर दी है।
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1. बैंक खाते क्यों और कैसे हुए फ्रीज?
अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा के अनुसार, विभाग ने उन उपभोक्ताओं को निशाना बनाया है जो ‘समाधान योजना’ के पात्र थे लेकिन बार-बार रिमाइंडर देने के बाद भी बिल जमा नहीं कर रहे थे।
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कानूनी प्रक्रिया: विभाग ने पहले ‘फार्म बी’ और फिर ‘फार्म सी’ के तहत कानूनी नोटिस जारी किए।
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कड़ी कार्रवाई: जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो राजस्व वसूली के अधिकारों का उपयोग करते हुए बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए।
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आंकड़े: * विजय नगर संभाग: ₹61.44 लाख की वसूली हेतु 159 बैंक खाते फ्रीज।
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दक्षिण संभाग: ₹3 लाख की वसूली हेतु 15 बैंक खाते फ्रीज।
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2. 3 बकायेदारों को जेल: लोक अदालत के आदेश की अवहेलना
यह मामला बिजली चोरी और समझौतों से जुड़ा है। तीन उपभोक्ताओं ने लोक अदालत में बिजली चोरी के प्रकरणों में छूट का लाभ लिया था और राशि जमा करने का वादा किया था।
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धोखाधड़ी: छूट मिलने के बावजूद इन्होंने राशि जमा करने में कोई रुचि नहीं दिखाई।
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न्यायालय का आदेश: न्यायालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए।
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गिरफ्तारी: पुलिस के सहयोग से तीनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।
3. उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी
बिजली विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बकाया बिल नहीं भरा गया, तो आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज होगा। विभाग अब केवल कनेक्शन काटने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी रास्तों से बैंक खातों और चल-अचल संपत्ति पर भी कार्रवाई करेगा।
कार्रवाई का सारांश: एक नजर में
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
| कुल सीज बैंक खाते | 174 |
| कुल वसूली लक्ष्य (विजय नगर) | ₹61.44 लाख |
| जेल भेजे गए बकायादार | 03 (बिजली चोरी/समझौता उल्लंघन) |
| अधिकारी | संजय अरोरा (अधीक्षण अभियंता, जबलपुर) |
| उपयोग की गई शक्तियां | तहसीलदार (राजस्व) के प्रदत्त अधिकार |








