इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक अज्ञात ईमेल के जरिए पूरे परिसर को ‘सायनाइड गैस बम’ से उड़ाने की धमकी दी गई। इस धमकी भरे संदेश में न केवल विस्फोट का जिक्र था, बल्कि CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) से जुड़े एक मामले का हवाला भी दिया गया था, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं।

न्यूज़ हेडलाइंस
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खतरनाक धमकी: आउटलुक आईडी से आए मेल में ‘सायनाइड गैस’ के इस्तेमाल का दावा।
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CBI का जिक्र: ईमेल में एक पुराने मामले और जांच एजेंसी का नाम आने से मामला हुआ पेचीदा।
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सुरक्षा घेरा: तेजाजी नगर पुलिस और बम निरोधक दस्ते (BDDS) ने घंटों खंगाला चप्पा-चप्पा।
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जांच का दायरा: साइबर सेल को मिले दक्षिण भारत से जुड़े संकेत; वीपीएन (VPN) के इस्तेमाल की आशंका।
ईमेल देख उड़े होश: ‘सायनाइड’ के जिक्र से फैली दहशत
सोमवार को आरटीओ कार्यालय की आधिकारिक आईडी पर एक संदिग्ध मेल प्राप्त हुआ। ईमेल खोलते ही कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि इसमें सामान्य बम के बजाय ‘सायनाइड गैस बम’ से हमले की बात लिखी थी।
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तत्काल एक्शन: वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना मिलते ही आरटीओ परिसर को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई और पुलिस को अलर्ट किया गया।
घंटों चली तलाशी, पर नहीं मिला कुछ संदिग्ध
सूचना मिलते ही तेजाजी नगर थाना पुलिस और बम डिस्पोज़ल स्क्वॉड (BDDS) मौके पर पहुँचे।
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सघन चेकिंग: पार्किंग एरिया, वेटिंग हॉल, फिटनेस सेंटर और आरटीओ की मुख्य बिल्डिंग के हर कोने की बारीकी से जांच की गई।
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परिणाम: घंटों चले सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली, क्योंकि परिसर में कोई भी विस्फोटक सामग्री या संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई।
CBI वाला ‘सीक्रेट’ कनेक्शन क्या है?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात ईमेल की भाषा और उसमें किया गया CBI का जिक्र है। पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या यह किसी पुराने भ्रष्टाचार मामले की जांच से जुड़ा प्रतिशोध है या फिर केवल जांच एजेंसियों को गुमराह करने की एक बड़ी साजिश।
“ईमेल में सीबीआई से जुड़े एक मामले का संदर्भ दिया गया है। हम इसकी गहनता से जांच कर रहे हैं कि इसका वास्तविक मकसद क्या है। फिलहाल परिसर पूरी तरह सुरक्षित है।”
— कृष्ण लालचंदानी, डीसीपी, इंदौर
साइबर सेल खंगाल रही है ‘डिजिटल फुटप्रिंट’
प्रारंभिक जांच में ईमेल के तार दक्षिण भारत से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन (Virtual Private Network) का सहारा लिया होगा। इंदौर पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरह के मेल अन्य सरकारी संस्थानों को भी भेजे गए हैं।








