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भोपाल में ‘शिक्षा सत्याग्रह’: 50 हजार शिक्षकों ने घेरी राजधानी; पात्रता परीक्षा (TET) को बताया ‘अनुभव का अपमान’, सरकार और संगठन पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

भोपाल | मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और सरकार के खिलाफ प्रदेश के शिक्षकों ने अब तक का सबसे बड़ा बिगुल फूँक दिया है। ...

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| सतना टाइम्स

भोपाल | मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी और सरकार के खिलाफ प्रदेश के शिक्षकों ने अब तक का सबसे बड़ा बिगुल फूँक दिया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में भोपाल की सड़कें शिक्षकों के सैलाब से पट गईं। 25 से 30 सालों का अनुभव रखने वाले गुरुजी अब परीक्षा की अनिवार्यता के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

मुख्य बिंदु 

  • ऐतिहासिक जुटान: भोपाल के जम्बूरी मैदान से लेकर नीलम पार्क तक 50,000 से अधिक शिक्षकों की गूँज।

  • अनुभव बनाम परीक्षा: वरिष्ठ शिक्षकों का तर्क— “दो-तीन दशकों की सेवा के बाद अब परीक्षा लेना मानसिक प्रताड़ना और अपमान है।”

  • सुप्रीम कोर्ट में जंग: राज्य सरकार और शिक्षक संगठनों ने आदेश के खिलाफ दायर की पुनर्विचार याचिका (Review Petition)।

  • बड़ी मांग: केंद्र सरकार हस्तक्षेप कर आदेश को निरस्त करे या RTE नियमों में संशोधन लाए।


क्यों सुलग रही है विरोध की आग?

यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया आदेश के बाद उपजा है, जिसमें सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है।

  1. RTE से पहले की नियुक्तियां: शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून आने से पहले के नियमों के तहत हुई थी, इसलिए उन पर यह कानून पूर्वव्यापी (Retrospectively) तरीके से लागू नहीं होना चाहिए।

  2. भविष्य पर संकट: यदि परीक्षा अनिवार्य होती है और कोई शिक्षक असफल रहता है, तो हजारों अनुभवी शिक्षकों की नौकरी और इंक्रीमेंट पर तलवार लटक जाएगी।

संयुक्त मोर्चा का अल्टीमेटम

मोर्चा के प्रदेश संयोजक जगदीश यादव ने हुंकार भरते हुए कहा कि यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सम्मान की लड़ाई है। जब तक लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और जनजातीय कार्य विभाग अपने आदेश वापस नहीं लेते, यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।


सरकार का स्टैंड: बैकफुट पर प्रशासन?

राहत की बात यह है कि चुनावी साल और शिक्षकों की नाराजगी को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार भी उनके समर्थन में नजर आ रही है। सरकार ने भी कोर्ट में याचिका दाखिल कर शिक्षकों के पक्ष में दलील दी है। हालांकि, केंद्र सरकार और NCTE (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) के नियमों के पेंच के कारण मामला उलझा हुआ है।


खबर का सारांश 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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