रीवा/सूरत। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रविवार को गुजरात और स्थानीय पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र की ‘शिल्पी उपवन’ कॉलोनी के एक फ्लैट में दबिश देकर पुलिस ने 13 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी उत्तराखंड के रहने वाले हैं, जो रीवा में छात्र बनकर छिपे थे और देशभर में डिजिटल डकैती डाल रहे थे।
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कैसे फंसाया 70 लाख का शिकार?
इस गिरोह का भंडाफोड़ तब हुआ जब गुजरात के सूरत में एक रिटायर्ड बुजुर्ग के साथ 70 लाख रुपये की बड़ी ठगी हुई। आरोपियों ने बुजुर्ग के मोबाइल पर एक खतरनाक APK फाइल भेजी। जैसे ही बुजुर्ग ने उस फाइल को डाउनलोड किया, उनका फोन हैक हो गया और देखते ही देखते बैंक अकाउंट से मोटी रकम साफ कर दी गई।
रीवा पुलिस और सूरत पुलिस का ज्वाइंट ऑपरेशन
सूरत पुलिस ने लोकेशन ट्रेस करते हुए रीवा पुलिस से संपर्क किया। विश्वविद्यालय थाना प्रभारी हितेंद्रनाथ शर्मा के नेतृत्व में टीम ने जब फ्लैट पर छापा मारा, तो वहां का नजारा किसी ‘कंट्रोल रूम’ जैसा था।
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बड़ी बरामदगी: पुलिस ने मौके से दर्जनों लैपटॉप, कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त किए हैं।
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पहचान छुपाने का तरीका: ये ठग खुद को स्टूडेंट बताकर किराए के मकान में रह रहे थे ताकि पड़ोसियों को शक न हो।
क्या है ‘APK फाइल’ वाला नया फ्रॉड?
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोगों को लुभावने मैसेज या सरकारी अपडेट के नाम पर APK (Android Package) फाइल भेजता है।
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इंस्टॉलेशन: यूजर जैसे ही इसे इंस्टॉल करता है, फोन का पूरा एक्सेस (OTP, मैसेजेस, गैलरी) ठगों के पास पहुंच जाता है।
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क्लीन स्वीप: इसके बाद ठग बिना किसी शोर-शराबे के बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं।
पूछताछ में खुलेंगे कई बड़े राज
पकड़े गए सभी 13 आरोपी उत्तराखंड के मूल निवासी हैं। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह ठिकाने बदल-बदल कर देशभर में सक्रिय रहता है। हिरासत में लिए गए युवकों से पूछताछ जारी है, जिससे देश के अन्य हिस्सों में हुई करोड़ों की ठगी का खुलासा होने की उम्मीद है।
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें!
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अनजान नंबर से आई किसी भी Link या APK File पर क्लिक न करें।
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अपने फोन की सेटिंग में ‘Unknown Sources’ से ऐप इंस्टॉल करने का विकल्प बंद रखें।








