सतना। सतना के सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल के ब्लड बैंक ने मानवता को शर्मसार करने वाली करतूत को अंजाम दिया है। थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहे 5 मासूम बच्चों को अस्पताल ने वह ‘जहर’ दे दिया, जिसकी टीस वे उम्र भर सहेंगे। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी की गई ‘चार्जशीट’ ने खुलासा किया है कि ब्लड बैंक के अधिकारियों और लैब तकनीशियनों ने बिना मानक जांच (CLIA) किए संक्रमित और एक्सपायर्ड खून बच्चों को चढ़ा दिया, जिससे वे HIV पॉजिटिव हो गए।

न्यूज़ हेडलाइंस
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अपराधिक शॉर्टकट: महंगे CLIA टेस्ट के बजाय सस्ते ‘रैपिड कार्ड’ से की गई जांच; 5 बच्चों की जिंदगी हुई तबाह।
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फर्जी रिकॉर्ड: डोनर्स का हीमोग्लोबिन और डेटा बिना जांचे ही रिकॉर्ड में ‘ऑल ओके’ भरा गया।
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खतरनाक लापरवाही: 14 संक्रमित डोनर्स में से 9 का रिकॉर्ड गायब; समाज के लिए बने ‘चलता-फिरता बम’।
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जिम्मेदारों पर गाज: तत्कालीन प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल और तकनीशियनों पर आपराधिक लापरवाही के आरोप।
पैसे बचाने के चक्कर में ‘मौत’ का सौदा
जांच रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच ब्लड बैंक में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाई गईं।
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रैपिड कार्ड का खेल: संक्रमण जांच के लिए अनिवार्य 4th Generation ELISA या CLIA तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया। बहाना बनाया गया कि ‘रीएजेंट’ (रसायन) उपलब्ध नहीं था, जबकि हकीकत में सस्ते और कम संवेदनशील ‘रैपिड कार्ड’ से खानापूर्ति की गई।
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एक्सपायर्ड खून: रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि कुछ बच्चों को एक्सपायर्ड खून तक चढ़ा दिया गया।
डोनर स्क्रीनिंग में बड़ा फर्जीवाड़ा
ब्लड बैंक का रिकॉर्ड पूरी तरह फर्जी पाया गया है।
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डोनर्स के पते, व्यवसाय और हीमोग्लोबिन के कॉलम खाली थे।
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रिकॉर्ड में सभी डोनर्स का हीमोग्लोबिन 12g/dl से ऊपर दिखाया गया, जो जांच में पूरी तरह मनगढ़ंत साबित हुआ।
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सबसे डरावनी बात यह है कि 14 संक्रमित डोनर्स की पहचान हुई थी, जिनमें से 9 का कोई अता-पता नहीं है। ये अज्ञात डोनर अब समाज में संक्रमण फैलने का बड़ा खतरा बन चुके हैं।
दिसंबर में खुला था राज
इस खौफनाक मंजर का खुलासा तब हुआ जब नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए आने वाले इन 5 बच्चों की रूटीन जांच में रिपोर्ट HIV पॉजिटिव आई। तब से स्वास्थ्य विभाग मामले को दबाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब ‘चार्जशीट’ ने दोषियों के नाम और उनके कारनामों को सार्वजनिक कर दिया है।
खबर का सारांश
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पीड़ित: थैलेसीमिया से जूझ रहे 5 मासूम बच्चे।
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दोषी: तत्कालीन प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल और लैब स्टाफ।
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मुख्य लापरवाही: CLIA टेस्ट न करना, संक्रमित डोनर का रिकॉर्ड न रखना और एक्सपायर्ड खून चढ़ाना।
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असर: 5 बच्चों को ताउम्र HIV के साथ जीना होगा।








