इंदौर। क्या आप आयुर्वेदिक समझकर कफ सिरप का इस्तेमाल कर रहे हैं? अगर हाँ, तो यह खबर आपको चौंका सकती है। इंदौर के धरमपुरी क्षेत्र में संचालित एक आयुर्वेदिक कफ सिरप फैक्ट्री पर प्रशासन की कार्रवाई में डराने वाले तथ्य सामने आए हैं। यहाँ बनने वाले सभी 30 प्रकार के सिरप लैब टेस्टिंग में अमानक पाए गए हैं।
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ग्वालियर लैब की रिपोर्ट ने उड़ाए होश
प्रशासनिक टीम ने कुछ दिन पहले इस फैक्ट्री पर दबिश दी थी और वहाँ बन रहे सिरप के सैंपल जब्त कर ग्वालियर स्थित सरकारी लैब भेजे थे। लैब की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि:
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जांच के लिए भेजे गए शत-प्रतिशत (100%) सैंपल फेल हो गए हैं।
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आयुर्वेदिक दावों के उलट, इन सिरप में हानिकारक रासायनिक तत्व मिले हैं।
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ये रसायन मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक और जानलेवा साबित हो सकते हैं।
लाइसेंस की आड़ में ‘जहर’ का कारोबार
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि फैक्ट्री संचालक के पास कागजों पर लाइसेंस तो मौजूद था, लेकिन फैक्ट्री के अंदर के हालात बदतर थे।
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भारी गंदगी: दवाइयों का निर्माण अत्यधिक गंदगी और अव्यवस्थित परिस्थितियों में किया जा रहा था।
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मानकों का उल्लंघन: निर्माण इकाई में स्वच्छता और सुरक्षा के किसी भी मानक का पालन नहीं हो रहा था।
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धोखाधड़ी: आयुर्वेद के नाम पर लोगों को हानिकारक केमिकल पिलाया जा रहा था।
कलेक्टर के सख्त निर्देश: फैक्ट्री सील, संचालक पर FIR
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं:
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फैक्ट्री परिसर को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
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फैक्ट्री संचालक के खिलाफ FIR दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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बाजार में सप्लाई किए गए स्टॉक को वापस लेने और नष्ट करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है।
प्रशासन की इस कार्रवाई ने आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर ने आमजन से अपील की है कि दवाइयां खरीदते समय ब्रांड और गुणवत्ता की जांच जरूर करें।








