जबलपुर | शुक्रवार, 01 मई 2026 जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे के दूसरे दिन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक ऐसी मार्मिक तस्वीर सामने आई, जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया। पानी की गहराई से जब दिल्ली की रहने वाली मरिना मैसी का शव निकाला गया, तो वे अपने 4 साल के बेटे त्रिशान को सीने से चिपकाए हुए थीं। मौत के आगोश में जाने के बाद भी मां की ममता ने बेटे का साथ नहीं छोड़ा था।

हादसे की ताज़ा स्थिति
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कुल सवार: सीसीटीवी फुटेज के अनुसार क्रूज पर 43 लोग सवार थे।
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रेस्क्यू: अब तक 28 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
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कैजुअल्टी: कुल 9 शव बरामद किए गए हैं, जबकि 6 अभी भी लापता हैं।
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बड़ी लापरवाही: यात्रियों का आरोप— “हमें लाइफ जैकेट नहीं दी गई, लॉकर तोड़कर खुद निकालनी पड़ी।”
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मासूम सिया की आपबीती: “किसी ने नहीं दी लाइफ जैकेट”
हादसे में बची मासूम सिया ने रोते हुए बताया कि वे शाम 5:30 बजे क्रूज पर सवार हुए थे। क्रूज स्टाफ ने किसी को लाइफ जैकेट नहीं दी। जब तूफान आया और पानी अंदर भरने लगा, तब सिया के पिता और एक अन्य व्यक्ति ने जान जोखिम में डालकर लॉकर तोड़ा और लाइफ जैकेट निकाली। सिया और उसके पिता प्रदीप की जान तो बच गई, लेकिन उसकी मां और छोटा भाई पानी में समा गए।
ग्रामीणों की चेतावनी को किया अनसुना
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मौसम खराब देख क्रूज ले जाने से मना किया था, लेकिन प्रबंधन ने इसे अनसुना कर दिया। हादसे के बाद सबसे पहले गांव वाले ही मदद के लिए आगे आए और कई लोगों की जान बचाई।
जांच के घेरे में पर्यटन विभाग
पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने मौके पर पहुंचकर जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि टिकट केवल 29 लोगों के थे, लेकिन बच्चों को मिलाकर संख्या 43 तक पहुंच गई थी। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि अब क्रेन की मदद से क्रूज को पानी से बाहर निकाला जा रहा है, ताकि स्थिति और स्पष्ट हो सके।
लापरवाही के बड़े सवाल?
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लाइफ जैकेट यात्रियों को पहनाने के बजाय लॉकर में क्यों बंद थी?
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तूफान और ऊंची लहरों की चेतावनी के बावजूद क्रूज को बीच मजधार में क्यों ले जाया गया?
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क्या क्रूज के फिटनेस और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच हो रही थी?








