भोपाल/रीवा। मध्य प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाली योजनाओं— ‘जननी सुरक्षा योजना’ और ‘मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना’ के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने पर स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। लंबे समय से लंबित भुगतानों और कार्य के प्रति उदासीनता को देखते हुए तीन अधिकारियों पर आर्थिक दंड लगाया गया है।

क्यों हुई कार्रवाई?
विभागीय जांच में सामने आया कि इन अधिकारियों ने पात्र हितग्राहियों (प्रसूताओं) के भुगतान को अनावश्यक रूप से अटकाए रखा था।
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असंतोषजनक जवाब: पहले इन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था, लेकिन इनके जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।
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आदेशों की अवहेलना: नोटिस मिलने के बाद भी इन अधिकारियों ने लंबित मामलों के निराकरण में कोई रुचि नहीं दिखाई, जिसे अनुशासनहीनता और घोर लापरवाही माना गया।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज?
वेतन कटौती के आदेश जिन तीन अधिकारियों के लिए जारी हुए हैं, वे हैं:
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रोहित सिंह: ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक (BPM), हनुमना, जिला रीवा (मऊगंज)।
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रोहित सिंह: ब्लॉक लेखा प्रबंधक, सिहावल, जिला सीधी।
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अरुण सिंह: लेखा प्रबंधक, जिला चिकित्सालय, सीधी।
मिशन संचालक की सख्त चेतावनी
NHM के मिशन संचालक ने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रसूताओं को समय पर आर्थिक मदद पहुँचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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कठोर दंड की चेतावनी: यदि भविष्य में कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो इन अधिकारियों के विरुद्ध ‘दीर्घशास्ति’ (बड़ी सजा) के तहत सेवा समाप्ति की कार्रवाई भी की जा सकती है।
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अनुशासन का संदेश: इस कार्रवाई का उद्देश्य पूरे विभाग को यह संदेश देना है कि गरीब और जरूरतमंदों से जुड़ी योजनाओं में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
योजनाओं का महत्व
‘जननी सुरक्षा’ और ‘प्रसूति सहायता’ योजनाओं का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देना और गरीब परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। भुगतान में देरी होने से न केवल प्रसूताओं को कठिनाई होती है, बल्कि शासन की कल्याणकारी छवि पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
कार्रवाई: एक नज़र में
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विभाग: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), मध्य प्रदेश।
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सजा: 10 दिवस के वेतन की कटौती।
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वजह: जननी सुरक्षा एवं प्रसूति सहायता योजना के भुगतान में अनावश्यक देरी।
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क्षेत्र: रीवा (हनुमना) और सीधी (सिहावल व जिला अस्पताल)








