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सतना: खाकी पर दाग! लापता पत्नी को खोजने के नाम पर पुलिस ने ‘काटी जेब’, गोवा की सैर में लुटाए 65 हजार, अब फिर बना रहे दबाव

सतना |  मध्य प्रदेश के सतना जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम लवर ...

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| सतना टाइम्स

सतना |  मध्य प्रदेश के सतना जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम लवर के साथ भागी पत्नी की तलाश में मदद करने के बजाय, सिविल लाइन थाना पुलिस पर पीड़ित पति से हजारों रुपये खर्च कराने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगे हैं। परेशान पति ने अब न्याय के लिए सीएम हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाया है।

खबर के मुख्य अंश

  • इंस्टाग्राम का चक्कर: तीन बच्चों को छोड़कर जबलपुर के एक युवक के साथ गोवा भागी पत्नी।

  • पुलिस की ‘पिकनिक’: लोकेशन के नाम पर पुलिसकर्मी ने पति के खर्च पर की गोवा की यात्रा; फूंक डाले 65 हजार रुपये।

  • शून्य परिणाम: मोटी रकम खर्च कराने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली, पत्नी का कोई सुराग नहीं।

  • दोबारा दबाव: अब फिर से गोवा जाने के लिए टिकट बुक कराने का बनाया जा रहा है दबाव।


क्या है पूरा मामला?

पीड़ित के अनुसार, उसकी पत्नी 11 मार्च 2026 से लापता है। उसे इंस्टाग्राम पर रील बनाने का शौक था, जिसके जरिए उसकी पहचान जबलपुर के एक युवक से हुई। पत्नी अपने तीन बच्चों को छोड़कर उस युवक के साथ भाग निकली। जब पति ने सिविल लाइन थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई, तो पुलिस ने मदद के नाम पर उसे आर्थिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

“खोजना है तो खर्चा तो करना पड़ेगा”

पीड़ित का आरोप है कि एक पुलिसकर्मी उसे यह कहकर गोवा ले गया कि वहां लोकेशन मिली है। इस पूरी यात्रा का सारा खर्च (होटल, खाना, सफर) पति से कराया गया। करीब 65 हजार रुपये खर्च करने के बाद भी पुलिस को कुछ हासिल नहीं हुआ। अब हद तो तब हो गई जब पुलिसकर्मी दोबारा गोवा चलने के लिए टिकट कराने का दबाव बना रहे हैं और दो टूक कह रहे हैं कि बिना खर्चे के काम नहीं होगा।

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत

पुलिस के इस रवैये से तंग आकर पीड़ित ने शिकायत क्रमांक 38015990 के जरिए अपनी गुहार लगाई है। उसने आरोप लगाया है कि पुलिस विवेचना में जानबूझकर देरी कर रही है और उसे ‘एटीएम’ की तरह इस्तेमाल कर रही है।

प्रशासनिक सवाल:

  1. क्या किसी गुमशुदा की तलाश के लिए पुलिस का खर्च पीड़ित उठाएगा?

  2. बिना ठोस सूचना के किसी नागरिक को हजारों किलोमीटर दूर ले जाना और पैसे खर्च कराना क्या नियमों का उल्लंघन नहीं है?

  3. क्या अब न्याय केवल उन्हीं को मिलेगा जो पुलिस की ‘सैर-सपाटे’ का खर्च उठा सकेंगे?


प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें