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ग्वालियर में कानून के साथ ‘धोखा’: ननद को ‘सौतन’ बताकर पत्नी ने लिया एकतरफा तलाक; 5 साल बाद फोटो का सच सामने आया तो उड़े पति के होश

ग्वालियर | न्याय के मंदिर में झूठ बोलकर डिक्री हासिल करने का एक अनोखा मामला ग्वालियर हाई कोर्ट पहुँचा है। यहाँ एक महिला ...

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| सतना टाइम्स

ग्वालियर | न्याय के मंदिर में झूठ बोलकर डिक्री हासिल करने का एक अनोखा मामला ग्वालियर हाई कोर्ट पहुँचा है। यहाँ एक महिला ने अपने पति से तलाक लेने के लिए अपनी सगी ननद को ही ‘सौतन’ करार दे दिया। महिला ने एक पारिवारिक फोटो को आधार बनाकर कोर्ट में दावा किया कि यह उसके पति की दूसरी पत्नी है। इस झूठे साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने एकतरफा तलाक का फैसला सुना दिया, जिसकी भनक पति को 5 साल बाद लगी।

मुख्य बिंदु 

  • साजिश: महिला ने फैमिली कोर्ट में अपने पति की सगी बहन को उसकी ‘दूसरी बीवी’ बताकर पेश किया।

  • झूठा साक्ष्य: एक ग्रुप फोटो, जिसमें पति अपनी बहन के साथ था, उसे अवैध शादी का सबूत बताया गया।

  • एकतरफा फैसला: पति के बाहर रहने और नोटिस न मिलने का फायदा उठाकर महिला ने 2021 में तलाक की डिक्री हासिल कर ली।

  • खुलासा: अप्रैल 2026 में जब पति को तलाक की जानकारी मिली, तब इस पूरी धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ।


1998 में हुआ था निकाह, 2015 से बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार, ग्वालियर की रहने वाली महिला का निकाह 1998 में एक मार्केटिंग अधिकारी से हुआ था। पति की बाहर नौकरी होने के कारण 2015 से दोनों अलग रहने लगे थे। महिला किसी भी कीमत पर तलाक चाहती थी, जबकि पति सुलह की कोशिश में था। आखिर में महिला ने कानून का ‘शॉर्टकट’ अपनाया और ननद को ही मोहरा बना दिया।

कैसे पकड़ी गई धोखाधड़ी?

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित पति को हाल ही में अपने तलाकशुदा होने की जानकारी मिली। जब उसने कोर्ट के रिकॉर्ड और उस विवादित फोटो को देखा, तो वह सन्न रह गया। जिस महिला को उसकी दूसरी पत्नी बताया गया था, वह उसकी अपनी सगी बहन थी। अब इस मामले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।


सरकारी अधिवक्ता का पक्ष

“महिला ने कोर्ट को गुमराह कर फर्जी साक्ष्य पेश किए। जिस फोटो के आधार पर तलाक लिया गया, उसमें मौजूद महिला पति की सगी बहन है। हमने इस एकतरफा डिक्री को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।” > — धर्मेन्द्र शर्मा, शासकीय अधिवक्ता


कानूनी परिणाम की आशंका

कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि कोर्ट में धोखाधड़ी साबित होती है, तो महिला के खिलाफ ‘न्यायालय को गुमराह करने’ और ‘फर्जी दस्तावेज/साक्ष्य पेश करने’ की धाराओं के तहत गंभीर कार्रवाई हो सकती है। यह मामला न केवल रिश्तों की गरिमा बल्कि न्याय प्रणाली की सतर्कता पर भी सवाल खड़े करता है।


खबर का सारांश 

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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