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पन्ना टाइगर रिजर्व में ‘विद्रोह’: पन्ना के कोर एरिया में घुसे 200 आदिवासी; केन-बेतवा प्रोजेक्ट के खिलाफ ‘चिता आंदोलन’ शुरू, सांकेतिक फांसी की चेतावनी से हड़कंप

पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व के इतिहास में पहली बार सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए 200 से अधिक आदिवासी ग्रामीण बाघों के ...

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| सतना टाइम्स

पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व के इतिहास में पहली बार सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए 200 से अधिक आदिवासी ग्रामीण बाघों के सबसे सुरक्षित ठिकाने यानी ‘कोर जोन’ में घुस गए हैं। पिछले 10 दिनों से चल रहा यह विरोध अब ‘चिता आंदोलन’ और ‘मिट्टी सत्याग्रह’ का रूप ले चुका है। मुआवजे और पुनर्वास में धांधली से नाराज ग्रामीणों ने अब सांकेतिक फांसी और भूख हड़ताल का ऐलान कर दिया है, जिससे वन विभाग और जिला प्रशासन के बीच हड़कंप मचा हुआ है।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • खतरनाक घुसपैठ: बाघों के गढ़ (कोर एरिया) में आदिवासियों का डेरा; सुरक्षा और वन्यजीवों पर मंडराया खतरा।

  • अंतिम चेतावनी: चिता आंदोलन के बाद ग्रामीणों का ऐलान— “मांगें पूरी नहीं हुईं तो सामूहिक रूप से लगाएंगे फांसी।”

  • कानूनी कार्रवाई: आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर पर FIR की तैयारी; 7 साल तक की जेल का है प्रावधान।

  • प्रशासनिक पेंच: पन्ना टाइगर रिजर्व का क्षेत्र और छतरपुर का नागरिक प्रशासन; कानूनी उलझन के कारण कार्रवाई में देरी।


क्यों ‘बारूद’ के ढेर पर बैठा है पन्ना?

केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण दर्जनों गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि:

  1. कागजी वादे: प्रशासन द्वारा पुनर्वास और मुआवजे के जो वादे किए गए थे, वे धरातल पर शून्य हैं।

  2. मुआवजे में धांधली: जमीन आवंटन और मुआवजा राशि के वितरण में भारी विसंगतियां और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।

  3. अस्तित्व की लड़ाई: सदियों से जल-जंगल-जमीन पर आश्रित आदिवासियों के पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा है।

वन्यजीव अधिनियम और सख्त सजा का खतरा

पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन इस घुसपैठ को लेकर सख्त रुख अख्तियार कर रहा है।

  • संगीन जुर्म: अधिसूचित कोर क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश वन्यजीव अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है।

  • सजा का प्रावधान: दोषियों को 3 से 7 साल की जेल और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वन अधिकारियों का कहना है कि बार-बार की चेतावनी के बाद भी ग्रामीण हटने को तैयार नहीं हैं।


प्रशासन की मजबूरी और सुरक्षा की चिंता

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जिस जगह प्रदर्शन हो रहा है, वह टाइगर रिजर्व का हिस्सा है लेकिन वहां का नागरिक प्रशासन छतरपुर जिले के पास है। इसी समन्वय की कमी के कारण पुलिस बल प्रयोग करने से बच रही है। प्रशासन को डर है कि किसी भी सख्त कार्रवाई से आदिवासी उग्र हो सकते हैं, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो जाएगी।


खबर का सारांश 

  • प्रदर्शनकारी: 200+ आदिवासी ग्रामीण।

  • स्थान: कोर एरिया, पन्ना टाइगर रिजर्व।

  • मुख्य मांग: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का उचित मुआवजा और पुनर्वास।

  • आंदोलन के रूप: चिता आंदोलन, मिट्टी सत्याग्रह और अब सांकेतिक फांसी की धमकी।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें