मैहर/सतना। आस्था के केंद्र मां शारदा धाम में उस समय भारी विवाद और आक्रोश की स्थिति बन गई, जब प्रदेश की प्रभारी मंत्री राधा सिंह ने जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन के आदेशों को ठेंगा दिखा दिया। नवरात्रि मेले की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने गर्भगृह में वीआईपी प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा रखी थी, लेकिन मंत्री जी ने न केवल इस नियम को तोड़ा बल्कि अपने लाव-लश्कर के साथ सीधे गर्भगृह में दाखिल होकर विशेष पूजा-अर्चना की।
न्यूज़ हेडलाइंस
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नियमों की धज्जियां: 17 मार्च को जारी ‘नो वीआईपी’ आदेश प्रभारी मंत्री के सामने हुआ फेल।
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भक्तों की फजीहत: घंटों कतार में खड़े हजारों श्रद्धालुओं को रोककर मंत्री को कराया गया प्रवेश।
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प्रशासन मूकदर्शक: सुरक्षा घेरे और कार्यकर्ताओं के दबाव में अधिकारियों ने टेके घुटने।
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सियासी घमासान: कांग्रेस ने पूछा— क्या नियम सिर्फ गरीब और आम जनता के लिए हैं?
प्रशासन का ‘स्पष्ट आदेश’ और मंत्री का ‘विशेष दर्शन’
नवरात्रि मेले के दौरान दूर-दराज से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन ने 17 मार्च को एक कड़ा दिशा-निर्देश जारी किया था। इसके तहत गर्भगृह में किसी भी वीआईपी के प्रवेश पर रोक थी ताकि आम भक्त बिना भेदभाव के दर्शन कर सकें।
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क्या हुआ मंगलवार को? सुबह करीब 11:00 बजे जब प्रभारी मंत्री राधा सिंह मंदिर पहुँचीं, तो प्रशासन के दावों की हवा निकल गई। वे सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों के साथ सीधे मां के गर्भगृह तक जा पहुँचीं, जबकि आम जनता बाहर तपती धूप में अपनी बारी का इंतजार करती रही।
धूप में तड़पे बच्चे और बुजुर्ग, अंदर चलती रही आरती
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब मंत्री जी भीतर विशेष पूजन कर रही थीं, तब सुरक्षा कारणों से बाहर की कतारें रोक दी गईं।
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अव्यवस्था: घंटों से कतार में लगे बूढ़े, बच्चों और महिलाओं को भीषण गर्मी में और अधिक समय तक खड़ा रहना पड़ा।
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श्रद्धालुओं में रोष: मंत्री के इस वीआईपी ट्रीटमेंट को देख भक्तों में भारी नाराजगी देखी गई, जिससे मंदिर परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
विपक्ष हमलावर: “नियम सिर्फ आम जनता के लिए?”
मैहर नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रशासन और सरकार को घेरा है।
“जब प्रशासन ने खुद वीआईपी दर्शन पर रोक लगाई है, तो मंत्री जी को गर्भगृह में प्रवेश कैसे मिला? क्या नियम सिर्फ गरीब और आम जनता के लिए हैं? इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधि पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।”
अधिकारियों की चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी मूकदर्शक बने रहे। नियमों की रक्षा करने वाले तंत्र ने सत्ता के दबाव में आम श्रद्धालुओं के हितों की अनदेखी की, जिससे अब मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।









