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Indore Fire Incident: परिवार को बचाते बचाते खुद आग में घिरा पिता, बच्चों ने बयां की घटना की दर्दनाक दास्तां

इंदौर के तिलक नगर क्षेत्र में हुआ यह अग्निकांड किसी डरावने सपने जैसा है। रबर कारोबारी मनोज पुगलिया की बहादुरी और परिवार ...

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| सतना टाइम्स

इंदौर के तिलक नगर क्षेत्र में हुआ यह अग्निकांड किसी डरावने सपने जैसा है। रबर कारोबारी मनोज पुगलिया की बहादुरी और परिवार के प्रति उनके समर्पण की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, इस हादसे का अंत उतना ही हृदयविदारक।एक ऐसा घर जिसे लोग अपनी सुंदरता के कारण निहारते थे, वह चंद मिनटों में मलबे और राख के ढेर में तब्दील हो गया।

HighLights

  1. मनोज ने परिवार बचाया, खुद आग और धुएं में फंसे।
  2. गैस सिलिंडर, केमिकल ड्रम धमाकों से आग और भड़की।
  3. फायर ब्रिगेड देरी से पहुंची, बचाव कार्य प्रभावित हुआ।

इंदौर। आग की लपटें जैसे-जैसे बढ़ रही थीं रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर में अफरा-तफरी मच रही थी। आग में घिरा परिवार बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा था। धुएं से सांस लेना संभव नहीं था। इसके बाद भी मनोज ने हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने पत्नी सुनीता और बेटों सौरभ, सौमिल व हर्षित को पहली मंजिल पर पहुंचाया अन्य को तलाशने में जुट गए। सुनीता ने हाथ पकड़ कर रोका मगर मनोज उन्हें सुरक्षित स्थान (जाली के पास) छोड़ कर लौट आए। तेज धुएं और भड़कती आग ने रास्ता रोक लिया और मनोज बेहोश होकर गिर गए। उनके घुटने का ऑपरेशन हुआ था

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फायर ब्रिगेड पर लगाए गंभीर आरोप

  • कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसीराम सिलावट, विधायक महेंद्र हार्डिया और महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी मौके पर आ गए थे। पुलिस आयुक्त(एडीजी) संतोष कुमार सिंह ने घटना की जानकारी दी। बताया कि हादसा कार चार्जिंग के कारण हुआ है।
  • सौरभ ने कहा कि फायर ब्रिगेड ने आने में देरी कर दी। मैं मदद मांग रहा था। उन्हें बताया कि सिमरन (पत्नी) और पापा अंदर ही हैं। मगर उन्होंने मुझे अनसुना कर दिया। मनोज के घर के सामने महावीर रिजेंसी (मल्टी) है। अर्पित जैन और अपूर्व जैन ने सबसे पहले आग की लपटे देखी और डायल-112 पर कॉल लगाया। बाल्टी भर कर पानी डाला पर लपटे पहली मंजिल तक चली गई। पानी के पाइप ने भी काम नहीं किया।
  • अर्पित के अनुसार करीब पौन घंटे बाद फायरकर्मी पहुंचे। पानी के टैंकर भी कम पड़ गए और मनोज का घर आग का गोला बन गया। धमाके की आवाज और तपन से 20 फीट दूर स्थित फ्लैट में भी रुकना मुश्किल हो गया था।

 

  • शवों को निकालने के बाद फोरेंसिक अफसर और बिजली कंपनी के एक्सपर्ट भी जांच करने पहुंचे। विशेषज्ञों ने जले हुए तार, स्विच बोर्ड और अन्य अवशेष बरामद किए है। दो महीने पूर्व ही मकान का रिनोवेशन कराया था। कईं लोग तो मकान की सुंदरता देख कर का फोटो खींच कर ले जाते थे।

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मैडम फायर ब्रिगेड भेजो, वो जलकर खाक हो जाऐंगे

  • पड़ौसी अपूर्व जैन और अर्पित जैन ने काल लगाया को डायल-112 ने कहा फायर ब्रिगेड को आने में 15 मिनट लगेंगे। बाहर ब्लास्ट की आवाज सुनाई दे रही थी। रहवासियों ने गुजारिश की और आपरेटर से कहा कि मैडम 15 मिनट में तो जलकर खाक हो जाऐंगे। सिलिंडर में ब्लास्ट की आवाज सुनाई और कहा -आप फूटने की आवाज सुन लिजिए। इतना सुनने के बाद ऑपरेटर ने फोन रख दिया। उस वक्त बिजली के पोल से आग बरस रही थी।
  • फायर ब्रिगेड कंट्रोल रूम के अनुसार पहला कॉल तड़के 4:01 बजे आया था। 4:19 पर गांधी हाल स्टेशन से पहली गाड़ी रवाना कर दी गई थी। इसके बाद मोती तबेला, लक्ष्मीबाई, जीएनटी मार्केट और सांवेर रोड़ से गाड़ियां पहुंचाई गई। करीब 1 लाख 70 हजार लीटर पानी से आग बुझाई है।
  • रहवासी नमित माहेश्वरी ने फायर ब्रिगेड पर लापरवाही का आरोप लगाया और एडिशनल डीसीपी जोन-1 मीना चौहान से कहा समय पर टैंकर आते तो जान बच सकती थी। रहवासी लगातार काल लगा रहे थे। कंट्रोल रूम से समय पर मदद नहीं मिली।

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केमिकल के ड्रम और गैस सिलेंडर बने ‘बम’

  • जोन प्रभारी(बिजली) उमेशसिंह के अनुसार चिंगारी से सबसे पहले पर्दे ने आग पकड़ ली। इसके बाद घर का अन्य सामान जला। पूरे घर में फर्नीचर का काम करवा रखा था। इस कारण आग बढ़ती गई। केमिकल के ड्रम और गैस सिलिंडर भी रखे हुए थे। आग से धमाके के साथ सिलिंडर फट गए।
  • इससे आग और खतरनाक हो गई। धमाकों ने न सिर्फ आग को भड़़काया बल्कि मकान के कईं हिस्सों को क्षतिग्रस्त कर दिया। उमेशसिंह ने गाड़ी गरम होने और लोकल चार्जिंग का इस्तेमाल करने का अंदेशा भी जताया है। पोर्च में खड़े दोपहिया वाहन भी पूरी तरह जल गए है।

चार साल बाद घर में खुशियां और पल भर में पसरा मातम

हादसे की जैसे ही इंटरनेट मीडिया पर सूचना फैली पुगलिया परिवार के रिश्तेदार, परिचित पहुंच गए। बाहर रहने वाले रिश्तेदारों ने एक दूसरे का कॉल लगाकर घटना बताई। नौकरानी सोनी ने कहा घर के सभी सदस्य खुश थे। उसने पूछा तो सुनीता ने कहा कि चार साल से जिस खबर का इंतजार था वो आई है। सुनीता बहू सिमरन के गर्भवती होने की बात कर रही थी। रहवासियों ने कहा मनोज मिलनसार थे। त्योहार भी सबके साथ मनाते थे। नवरात्रि में गरबा और होली पर सामूहिक कार्यक्रम करते थे।

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कैंसर से लड़ रहे पिता का हौंसला बढ़ाने आई थी बेटी

  • मनोज मूलत: सादलगढ़ (राजस्थान) के रहने वाले है। कारोबार के लिए वर्षों पूर्व घर छोड़ दिया था। कुछ सालों तक बिहार के किशनगंज में रहे और शादी के बाद इंदौर आ गए।
  • उनके साले विजय सेठिया कैंसर (फर्स्ट स्टेज) से जूझ रहे थे। 20 दिन पूर्व ऑपरेशन के लिए मनोज ने इंदौर बुला लिया था। विजय की बेटी रुचिका उर्फ टीनू अपने पिता का हालचाल जानने तीन दिन पहले ही किशनगंज से इंदौर पहुंची थी। उसके दो मासूम बेटी राशि और बेटा तनय। भतीजा कार्तिक भी साथ आ गया था।
  • अस्पताल में ऑपरेशन के बाद विजय का रेडिएशन का इलाज चल रहा था। मंगलवार को तीसरा रेडिएशन हुआ था। उसी रात घर में वे सब एक साथ थे और बहुत खुश थे। मंगलवार होने के कारण छोटी बहू सखी को मायके से नहीं ला पाए।
  • किशनगंज में विजय सेठिया की बहू प्रियंका के पास बुधवार सुबह कोलकाता से एक रिश्तेदार का फोन आया और बताया कि इंदौर में आग लगी है। मनोज और विजय की मौत हो गई है। खबर सुनते ही घर में मातम पसर गया। बेटा विकास सेठिया और अन्य रिश्तेदार इंदौर के लिए रवाना हो गए।
  • विजय सेठिया किशनगंज के धर्मशाला रोड पर करीब 20 साल से किराए के मकान में रहकर कास्मेटिक का कारोबार करते थे। महावीर मार्ग पर नया मकान बन रहा था। सपना था कि कैंसर का इलाज हो जाए और घर पूरा हो जाए।

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बचने के लिए भागती रही गर्भवती बहू

  • हाई सिक्युरिटी भी जान बचाने में बाधक बन गई। रहवासी महेंद्र जैन और मनोज शर्मा के अनुसार बाहर आग की लपटे थी, लेकिन छत सुरक्षित थी। पड़ोसी छतों के जरिए मनोज के घर की छत पर चढ़े। परिवार को आवाज लगाई। छत पर लगे चैनल गेट पर ताला लगा था। किसी ने उनकी आवाज नहीं सुनी।
  • आग बुझने और धुआं छंटने पर शवों को निकाला तो सिमरन और टीनू का शव चैनल के पास मिला। दोनों ने बचने की कोशिश की मगर उनका धुएं के कारण दम घुट चुका था। सिमरन के भाई जयेश के अनुसार चाबी ऊपर मंदिर के पास ही रखी थी। अफरा तफरी में किसी ने ध्यान नहीं दिया और सिमरन बाहर नहीं आ पाई।

घर में मिले आठ सिलिंडर

  • तिलक नगर टीआइ मनीष लोधा के अनुसार घर से आठ गैस सिलिंडर मिलें है। इसमें तीन व्यवसायिक और पांच घरेलू उपयोग के है। कुछ सिलिंडर में ब्लास्ट भी हुआ है। एसी और फ्रीज के कम्प्रेसर भी धमाके के साथ फट चुके थे।
  • टीआइ के अनुसार घर में काफी ज्वलनशील सामग्री थी। संपत्ति की सुरक्षा की पूरा ध्यान रखा गया, लेकिन आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। घर के आगे ही ट्रांसफार्मर लगा हुआ था। दरवाजों पर डबल लॉक लगाया गया था। दो-दो दरवाजे लगाए गए थे। अग्निशमन यंत्र नहीं थे। धुआं निकलने की गुंजाइश नहीं थी।

टाइम लाइन

  • 3:30 बजे आग की शुरुआत ।
  • 4:01 पर फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
  • 4:05 पर पुलिस का सेक्टर अधिकारी पहुंचा।
  • 4:19 पर गांधी हाल फायर स्टेशन से पहली गाड़ी भेजी।
  • 5:00 बजे पहला शव निकाल कर एमवायएच भेजा गया।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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