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मैहर: मवेशी की ‘खीस’ का स्वाद पड़ा जानलेवा! दामाद और बच्चों समेत 7 लोग अस्पताल पहुंचे, वजह जानकर हो जाएंगे सतर्क

मैहर (मध्य प्रदेश): जिले के ताला थाना क्षेत्र अंतर्गत पोड़ी खुर्द खजुरी ताल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ ...

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| सतना टाइम्स

मैहर (मध्य प्रदेश): जिले के ताला थाना क्षेत्र अंतर्गत पोड़ी खुर्द खजुरी ताल से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ ग्रामीण परिवेश का एक पारंपरिक और पौष्टिक माना जाने वाला व्यंजन पूरे परिवार के लिए मुसीबत का सबब बन गया। गाय के बछड़ा देने के बाद उसके पहले दूध से बनी ‘खीस’ (जिसे स्थानीय भाषा में तेली भी कहते हैं) खाने से एक ही परिवार के 7 लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पीड़ितों में 2 साल की मासूम बच्ची से लेकर 60 साल के बुजुर्ग तक शामिल हैं।

Maihar Food Poisoning News

क्या है पूरा मामला?

घटना 19 दिसंबर की है। पीड़ित परिवार के मुखिया रामबहोर साहू ने बताया कि उनकी गाय पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थी। मवेशी का इलाज एक वेटरनरी डॉक्टर से करवाया गया था, जिसने गाय को ठीक करने के लिए हाई डोज़ इंजेक्शन और दवाइयां दी थीं। इलाज के अगले ही दिन गाय ने बछड़े को जन्म दिया। परिवार ने खुशी-खुशी गाय के पहले गाढ़े दूध की ‘तेली’ (खीस) बनाई और पूरे परिवार ने उसका सेवन किया।

आधी रात को बिगड़ी तबीयत

‘खीस’ खाने के कुछ घंटों तक सब सामान्य रहा, लेकिन रात करीब 2 बजे अचानक एक-एक करके सभी सदस्यों की तबीयत बिगड़ने लगी। पूरे परिवार को गंभीर डायरिया और उल्टी की शिकायत हो गई। स्थिति को भांपते हुए घबराए परिजनों ने बिना देरी किए 20 दिसंबर को निजी वाहन से सभी पीड़ितों को सतना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

इलाज के बाद हालत खतरे से बाहर

डॉक्टरों ने जांच में पाया कि यह मामला ‘फूड पॉइजनिंग’ का है। फिलहाल, समय रहते इलाज मिलने से सभी की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों में शामिल हैं:

जानकारी का अभाव और लापरवाही बनी वजह

इस घटना के पीछे मुख्य वजह जानकारी का अभाव मानी जा रही है। रामबहोर साहू का आरोप है कि वेटरनरी डॉक्टर ने इलाज के दौरान उन्हें कोई चेतावनी नहीं दी थी। आमतौर पर, जब किसी दुधारू पशु को हाई डोज़ एंटीबायोटिक्स या दवाएं दी जाती हैं, तो कुछ दिनों तक उसका दूध सेवन योग्य नहीं होता क्योंकि दवाओं का रसायक अंश दूध में आ जाता है। यही रसायन इंसानों के लिए जहरीला साबित हुआ।

सावधानी: पशु चिकित्सकों का कहना है कि यदि मवेशी का इलाज चल रहा हो, तो उसके दूध का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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