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SDM के सामने किसान की ललकार: ‘नुकसान हुआ तो जिम्मेदारी आपकी’, जावरा ग्रीन फील्ड रोड को लेकर किसानों का MPRDC ऑफिस पर घेराव

उज्जैन: उज्जैन और रतलाम जिले के लगभग ढाई हजार किसान अपनी जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की मांगों को लेकर उग्र हो गए ...

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| सतना टाइम्स

उज्जैन: उज्जैन और रतलाम जिले के लगभग ढाई हजार किसान अपनी जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की मांगों को लेकर उग्र हो गए हैं। इन किसानों ने उज्जैन में एमपीआरडीसी (MPRDC) कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों के इस प्रदर्शन में भारतीय किसान संघ भी शामिल हुआ।

Ujjain-javra green feeld road

क्या है ग्रीन फील्ड रोड का विवाद?

उज्जैन से जावरा तक बनने वाले इस ग्रीन फील्ड रोड से दोनों जिलों के करीब 62 गांव के किसान प्रभावित हो रहे हैं। किसानों की मुख्य आपत्तियां और मांगें इस प्रकार हैं:

मांग/आपत्ति विवरण
मुआवजा शासकीय गाइडलाइन की बजाय वर्तमान बाजार भाव से दिया जाए।
मार्ग की ऊंचाई यह मार्ग कृषि भूमि से अधिक ऊंचाई पर बनाया जा रहा है, जिससे किसान अपनी जमीन का उपयोग नहीं कर पाएंगे और खेत पर आना-जाना मुश्किल होगा।
मार्ग का उपयोग किसानों को अपनी कृषि भूमि से निकलने वाले इस मार्ग का उपयोग करने की अनुमति दी जाए।
प्रकृति किसान इसे सिंहस्थ के लिए विकास नहीं, बल्कि विनाश बता रहे हैं और चाहते हैं कि इसे सामान्य मार्ग बनाया जाए।

किसान पुनीत सिंह कनोदीया ने कहा कि वे इस मामले को लेकर एक साल से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।

SDM के सामने किसान की खुली चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान जब एसडीएम पवन बारिया किसानों की बात सुनने मौके पर पहुँचे, तभी एक किसान ने उठकर एसडीएम को सख्त चेतावनी दी:

“जब तक हमारी मांगों का उचित निराकरण नहीं हो जाता, तब तक एमपीआरडीसी का कोई भी अधिकारी—कर्मचारी हमारी कृषि भूमि पर नहीं आए। कुछ किसान उग्र हैं, यदि कुछ नुकसान होता है तो, इसकी जिम्मेदारी हम लोगों की नहीं होगी।”

MPRDC का पक्ष

MPRDC के संभागीय अधिकारी विजय सिंह ने बताया कि किसानों की अधिकांश मांगें पॉलिसी मैटर हैं, जिनमें परियोजना में बदलाव करना होगा।

  • परियोजना की शर्त: इस प्रोजेक्ट में शर्त है कि मार्ग के दोनों ओर बैरिकेड लगाए जाएं ताकि कोई इसे क्रॉस न कर सके, और यहां टोल नाका भी लगाया जाना है।

  • मुआवजे पर विचार: मुआवजे के लिए पिछले 3 वर्ष की कृषि भूमि की रजिस्ट्री की कीमत को आधार बनाया जाएगा। इस संबंध में उज्जैन व रतलाम के कलेक्टर को प्रस्ताव भेजा गया है।

  • परियोजना विवरण: यह ₹2028 करोड़ का प्रोजेक्ट है जिसे 2 वर्ष में पूरा करना है। किसानों की मांगों को राज्य सरकार को भेजा जाएगा क्योंकि इससे परियोजना में बदलाव होगा।

किसानों ने फिलहाल यह सांकेतिक धरना दिया है, लेकिन मांगें पूरी न होने पर आगे उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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