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अंधविश्वास या आस्था? ‘मृत’ व्यक्ति की आत्मा लेने रतलाम मेडिकल कॉलेज पहुंचे आदिवासी, घंटे भर बजाए ढोल, थाली और लहराई तलवार

रतलाम (मध्य प्रदेश): रतलाम मेडिकल कॉलेज में बुधवार शाम एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला दृश्य सामने आया, जब आदिवासियों का ...

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| सतना टाइम्स

रतलाम (मध्य प्रदेश): रतलाम मेडिकल कॉलेज में बुधवार शाम एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला दृश्य सामने आया, जब आदिवासियों का एक समूह तीन महीने पहले मृत हुए एक व्यक्ति की ‘आत्मा’ को लेने के लिए अस्पताल परिसर में पहुंच गया। ढोल, थाली और गीतों की धुन पर महिला-पुरुषों का यह समूह अस्पताल के अंदर घुस गया और करीब एक घंटे तक धार्मिक अनुष्ठान किया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया।

‘आत्मा विदाई’ का अनोखा अनुष्ठान

झावनी झोड़िया गांव से आई यह टोली अपने गांव के शांतिलाल झोड़िया (जिसकी तीन माह पहले कीटनाशक पीने से मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी) की आत्मा को लेने आई थी। उनकी मान्यता के अनुसार, वे इस आत्मा को अपने गांव में एक ओटला बनाकर देवता के रूप में स्थापित करेंगे।

  • दृश्य: शाम करीब 4 बजे, ढोल और थाली बजाते हुए यह टोली अस्पताल के अंदर दाखिल हुई। महिलाओं ने गीत गाए, जबकि एक व्यक्ति ने तलवार लहराई। टोली में शामिल एक शख्स के सिर से खून भी बह रहा था।

  • परंपरा: आदिवासियों का कहना है कि उनकी समाज में आकस्मिक मौत होने पर परिजन उसी जगह जाते हैं, जहां मृत्यु हुई होती है। वहां आत्मा से अपने साथ चलने का आह्वान किया जाता है, और उसे पत्थर, लकड़ी या अन्य रूप में अपने साथ लेकर देवता के रूप में स्थापित किया जाता है। एक महिला सिर पर टोकरी रखे थी, जिसमें मृतक की आत्मा के प्रतीक के रूप में एक पत्थर था।

Ratlam News

भतीजे की आत्मा कर रही थी परेशान

मृतक शांतिलाल झोड़िया की बुआ नीता झोड़िया ने बताया कि उनका भतीजा अब बड़े भाई की बेटी (भतीजी) के शरीर में आकर उसे परेशान कर रहा है और यह कह रहा है कि “मुझे मेडिकल कॉलेज से लेकर आओ।” इसी कारण वे सब उसे लेने आए हैं।

सुरक्षा घेरा तोड़कर चला अंधविश्वास का खेल

रतलाम मेडिकल कॉलेज में आम तौर पर सुरक्षा गार्ड मरीजों के अटेंडरों के अलावा किसी को अंदर नहीं जाने देते। बावजूद इसके, करीब 10 लोग हाथों में नारियल और पूजा सामग्री लेकर बेधड़क अंदर घुसे और करीब एक घंटे तक यह ‘अंधविश्वास का खेल’ चलता रहा, और उन्हें किसी ने भी नहीं रोका।

करीब एक घंटे तक चले इस अनुष्ठान के बाद परिजन ढोल और थाली बजाते हुए आत्मा को लेकर गांव के लिए रवाना हो गए।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें

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