छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव स्थित बिलावर कला गांव के एक सरकारी स्कूल में एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। कक्षा 10वीं और 12वीं के कई छात्रों ने स्कूल की शिक्षिका सीमा मैथ्यूज और छात्रावास अधीक्षक नरेंद्र उईके के खिलाफ जुन्नारदेव थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि शिक्षिका उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर कर रही हैं और हिंदू रीति-रिवाजों से दूर रहने की नसीहत दे रही हैं।
क्लास में ईसाई धर्म की बातें और टीका-कलावा की मनाही
शिकायत में छात्रों ने बताया कि शिक्षिका सीमा मैथ्यूज कक्षा के दौरान ईसाई धर्म से जुड़ी बातें बताती हैं और छात्रों को बार-बार धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करती हैं।
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पुरानी परंपरा छोड़ने की नसीहत: छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षिका विशेष रूप से आदिवासी छात्रों को ‘पुरानी परंपरा छोड़ने’ और हिंदू रीति-रिवाजों से दूर रहने के लिए कहती हैं।
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दबाव: यदि कोई छात्र टीका लगाकर या कलावा बांधकर स्कूल आता है, तो शिक्षिका उसे जबरन टीका मिटाने और कलावा उतारने के लिए मजबूर करती हैं।
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धमकी: जो छात्र ऐसा करने से मना करते हैं, उन्हें टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) जारी करने की धमकी दी जाती है, जिससे बच्चों में डर और दबाव का माहौल बन गया है।
हिंदूवादी संगठन आए सामने
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और कन्हान बचाओ मंच ने भी विरोध दर्ज कराया है।
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ज्ञापन: विहिप के जिला मंत्री नितेश ‘गोलू’ सूर्यवंशी ने बताया कि छात्रों की शिकायत मिलने के बाद विहिप और कन्हान बचाओ मंच ने जनजातीय कार्य विभाग और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर शिक्षिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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संगठन का रुख: उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चों पर इस तरह के दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस ने शुरू की प्राथमिकता से जांच
पुलिस ने छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं और मामले की जांच शुरू कर दी है।
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नगर निरीक्षक राकेश सिंह बघेल ने बताया कि आरोप काफी गंभीर हैं, इसलिए मामले की प्राथमिकता से जांच की जा रही है।
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आगे की कार्रवाई: पुलिस फिलहाल सबूत और बयान जुटा रही है। जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
इस घटना के बाद स्थानीय अभिभावकों और लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि बच्चों की आस्था और परंपरा से छेड़छाड़ स्वीकार्य नहीं है और वे स्कूल में सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल चाहते हैं।








