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मध्य प्रदेश स्थापना दिवस: ‘ये कैसा अजूबा है?’, नेहरू भी चौंके थे नक्शा देखकर; पढ़ें अजब-गजब किस्से!

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस: 1 नवंबर 2025 को मध्य प्रदेश अपने स्थापना दिवस के 70 साल पूरे करने जा रहा है। इन ...

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| सतना टाइम्स

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस: 1 नवंबर 2025 को मध्य प्रदेश अपने स्थापना दिवस के 70 साल पूरे करने जा रहा है। इन सात दशकों में राज्य ने न सिर्फ राजनीतिक उथल-पुथल देखी है, बल्कि कई मोर्चों पर अपनी पहचान भी बनाई है। देश के सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में पिछले 8 साल से इंदौर का दबदबा कायम है। हालांकि, भोपाल गैस त्रासदी जैसी घटनाओं ने राज्य की छवि को धूमिल किया, लेकिन बदलते समय के साथ इसने खुद को फिर से साबित किया है।

  • 1 नवंबर 2025 को 70वां स्थापना दिवस
  • इंदौर लगातार 8 साल से सबसे स्वच्छ
  • भोपाल को राजधानी बनाने पर हुआ विवाद

 

नेहरू को लगा था ‘बेढंगा अजूबा’

जब देश को आजादी मिली (15 अगस्त 1947), तब राज्यों के पुनर्गठन को लेकर भाषाई आधार पर मतभेद थे। छह साल बाद, राज्य पुनर्गठन आयोग अस्तित्व में आया। वर्तमान मध्य प्रदेश उस समय चार हिस्सों में बंटा था:

  • मध्य प्रांत: राजधानी नागपुर
  • मध्य भारत: शीतकालीन राजधानी ग्वालियर, ग्रीष्मकालीन राजधानी इंदौर
  • विंध्य प्रदेश: राजधानी रीवा
  • भोपाल राज्य: राजधानी भोपाल

10 अक्टूबर 1955 को जब राज्य पुनर्गठन आयोग ने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सामने अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें मध्य प्रदेश के गठन का प्रस्ताव था, तो नेहरूजी नक्शा देखकर चौंक उठे। उन्होंने कहा, “अरे! यह क्या अजूबा है। ऐसा लंबा-चौड़ा और बेढंगा प्रदेश कैसे बन सकता है?” कई बड़े नेता इसके गठन के पक्ष में नहीं थे, लेकिन अंततः 1 नवंबर 1956 को नए मध्य प्रदेश का गठन हुआ।

(1 नव‍ंबर,1956 को मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर पं.रविशंकर शुक्ल का पहला भाषण लाल परेड ग्राउंड पर हुआ था।)
(1 नव‍ंबर,1956 को मध्य प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के तौर पर पं.रविशंकर शुक्ल का पहला भाषण लाल परेड ग्राउंड पर हुआ था।)

नमस्कार की परंपरा और राजधानी का विवाद

नमस्कार की शुरुआत:

  • 17 दिसंबर 1956 को मध्य प्रदेश विधानसभा का पहला सत्र शुरू हुआ।
  • शपथ लेने के बाद सदस्यों द्वारा सभापति से हाथ मिलाने की ‘अंग्रेजी सभ्यता’ का विधायक हीरालाल शर्मा ने विरोध किया।
  • माना जाता है कि इसी घटना के बाद से शपथ के बाद सभापति को नमस्कार करने की परंपरा शुरू हुई।

राजधानी पर खींचतान:

नए राज्य के गठन के बाद राजधानी चुनने पर खूब खींचतान हुई। ग्वालियर, इंदौर, रायपुर और जबलपुर प्रमुख दावेदार थे।

  1. जबलपुर को राजधानी बनाने का प्रस्ताव राज्य पुनर्गठन आयोग ने दिया था, और मामला लगभग तय था।
  2. लेकिन, तभी कुछ अखबारों में खबर छपी कि सेठ गोविंद दास के परिवार ने जबलपुर-नागपुर रोड पर जमीनें खरीदी हैं, जिससे उन्हें अच्छा मुआवजा मिले। इस कारण जबलपुर को रेस से बाहर कर दिया गया।
  3. अचानक भोपाल का नाम सामने आया, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को बेहद पसंद था।
  • कहा जाता है कि नेहरू, भोपाल के दीवाने थे और 1956 तक 18 बार वहां आ चुके थे। भोपाल में ट्रैक्टर टेस्टिंग संस्थान, पॉलिटेक्निक, और इंजीनियरिंग कॉलेज इसी ‘मोहब्बत’ की देन माने जाते हैं।
  • एक तर्क यह भी था कि विंध्य (जबलपुर) समाजवादी आंदोलन का गढ़ था, और उसे केंद्र नहीं बनने देना था।
  • एक वजह यह भी बताई जाती है कि सरदार पटेल, भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खां पर नजर रखना चाहते थे, जो भारत विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे, इसलिए भोपाल को राजधानी बनाया गया।
(भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी बनाये जाने की घोषणा के बाद नई दिल्ली से लौटे डॉ. शंकर दयाल शर्मा का भोपाल रेलवे स्टेशन पर शानदार स्वागत किया गया था।
(भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी बनाये जाने की घोषणा के बाद नई दिल्ली से लौटे डॉ. शंकर दयाल शर्मा का भोपाल रेलवे स्टेशन पर शानदार स्वागत किया गया था।

जबलपुर ने नहीं मनाई थी दीवाली

जब भोपाल को राजधानी बनाने का फैसला हुआ, तो जबलपुर के प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली में शीर्ष नेताओं से मिलकर भी निराशा हाथ लगी।

  • इसके विरोध में उस साल पूरे जबलपुर ने दीवाली नहीं मनाई थी।
  • हैरानी की बात है कि भोपाल जब राजधानी बना, तब उसकी आबादी महज 50 हजार थी और यह सीहोर जिले का हिस्सा था।
  • राजधानी बनने के 16 साल बाद, 1972 में भोपाल को अलग जिला बनाया गया।

सीएम ने ‘ग से गणेश’ को ‘ग से गधा’ करवाया

मध्य प्रदेश के पहले शिक्षा मंत्री (गठन के बाद) शंकरदयाल शर्मा थे, जो धर्मनिरपेक्षता के कट्टर समर्थक थे।

  • शिक्षा में अपने विचारों को उतारते हुए, उन्होंने किताबों में ‘ग से गणेश’ की जगह ‘ग से गधा’ लिखवा दिया था।

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प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें