सतना (मध्य प्रदेश): भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने शुक्रवार को अपनी धर्मपत्नी शशि त्रिपाठी के साथ अपनी जन्मभूमि सतना जिले के पैतृक गांव महुड़र पहुंचकर मिट्टी को नमन किया। आठ वर्ष की उम्र में पढ़ाई के लिए गांव छोड़ने वाले एडमिरल त्रिपाठी ने भावुक होते हुए कहा, “मैं अपनी मिट्टी से कभी दूर नहीं हुआ।” इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने अपने सरकारी स्कूल को ‘स्मार्ट क्लास’ की सौगात दी और युवाओं को आत्मविश्वास को सबसे बड़ी पूंजी बताया।
महुड़र में ऐतिहासिक स्वागत, उपमुख्यमंत्री भी रहे मौजूद
सतना जिले के रामपुर बाघेलान अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव महुड़र के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक गौरव लेकर आया। यहां की मिट्टी में पले-बढ़े, भारतीय नौसेना के प्रमुख के आगमन पर पूरे गांव ने उनका आत्मीय और जोरदार स्वागत किया। इस भव्य अभिनंदन समारोह में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी विशेष रूप से मौजूद रहे। एडमिरल त्रिपाठी और उनकी पत्नी के स्वागत में कई स्कूलों के छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े। एडमिरल ने मंच से अपने बचपन की यादों को साझा किया, जिस दौरान वह भावुक भी नजर आए।

युवाओं को दिया सफलता का मूलमंत्र
अभिनंदन समारोह के दौरान एडमिरल त्रिपाठी ने गांव के प्रतिभावान छात्रों को सम्मानित किया और युवाओं को सफलता का मूलमंत्र दिया।
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा:
आत्मविश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है, यह हर व्यक्ति के लिए ‘सेल्फ कॉन्फिडेंस बूस्टर’ है। मैं मात्र आठ वर्ष की आयु में पढ़ाई के लिए गांव से निकल गया था, लेकिन अपनी मिट्टी से कभी दूर नहीं हुआ। जब भी अवसर मिलता है, मैं महुड़र लौटता हूं, ताकि इस पवित्र धरती को नमन कर सकूं।”
नौसेना: देश के व्यापार और सीमाओं की मजबूत रीढ़
नौसेना प्रमुख ने देश की सुरक्षा में नौसेना की अहम भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत का 95 प्रतिशत आयात-निर्यात समुद्री मार्गों से होता है। उन्होंने गर्व से कहा कि ऐसे में भारतीय नौसेना देश के व्यापार और सीमाओं की सुरक्षा की “मजबूत रीढ़” है और हर परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए सतर्क और संकल्पित है।
पैतृक स्कूल को दो लाख की सहायता
महुड़र शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पहली बार किसी नौसेना प्रमुख के आगमन पर उत्सव का माहौल था। इस मौके पर एडमिरल त्रिपाठी ने अपने गांव को खास सौगात देते हुए स्कूल में ‘स्मार्ट क्लास’ के संचालन के लिए 2 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने नौसेना के गौरव, आईएनएस विक्रांत का एक स्मृति चिन्ह भी स्कूल को भेंट किया।








