गुना/रीवा (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे में कभी ‘सुपर कॉप’ के नाम से मशहूर रहा बर्खास्त सब-इंस्पेक्टर रामवीर सिंह कुशवाह उर्फ रामवीर दाऊ आज जेल की कालकोठरी में अपने गुनाहों का हिसाब दे रहा है। 1997 में एक आरक्षक के रूप में भर्ती हुए रामवीर का सफर जितना गौरवशाली शुरू हुआ था, उसका अंत उतना ही कलंकित रहा।
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1. सिपाही से ‘दाऊ’ बनने का सफर: एनकाउंटर और रसूख
रामवीर की किस्मत साल 2004 में बदली, जब गुना में कुख्यात अपराधी चिंटू शर्मा के एनकाउंटर के बाद उसे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला। वह सीधे हेड कांस्टेबल बन गया। यहीं से उसके भीतर सत्ता और वर्दी का अहंकार पनपा।
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रुतबा: वह सादे कपड़ों में, खुली जीप और निजी हथियारबंद गार्डों के साथ चलता था।
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नाम: जब तक कंधे पर सितारे (ASI और SI) नहीं लगे, उसने वर्दी नहीं पहनी। लोग उसे सम्मान और खौफ में ‘दाऊ’ (बड़ा भाई) कहने लगे।
2. नेशनल प्लेयर: जब RBI डकैती सुलझाने में की मदद
रामवीर की सबसे बड़ी ताकत थी पारदी गिरोह पर उसकी पकड़। साल 2016 में जब तमिलनाडु में सेलम-चेन्नई एक्सप्रेस की छत काटकर RBI के 5.80 करोड़ रुपये लूटे गए, तो देश की तमाम एजेंसियां नाकाम रहीं। तब तमिलनाडु पुलिस गुना पहुंची और रामवीर ने अपनी मुखबिरी के दम पर इस केस को सुलझाने में मदद की। इस सफलता ने उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
3. रक्षक बना भक्षक: आत्माराम पारदी मर्डर केस
रामवीर के पतन की कहानी 2015 में शुरू हुई। उसने आत्माराम पारदी नाम के युवक को शक के आधार पर उठाया। चश्मदीदों के मुताबिक, पुलिस की गोली से घायल आत्माराम को रामवीर अपनी निजी गाड़ी में डालकर ले गया, जिसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटा।
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मां का संघर्ष: आत्माराम की मां अप्पी बाई ने हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी।
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खुलासा: 7 साल बाद CID जांच में खुलासा हुआ कि आत्माराम की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद रामवीर को बर्खास्त कर दिया गया।
“विडंबना देखिए, जो शख्स करोड़ों की ट्रेन डकैती सुलझाने में देश की मदद कर रहा था, वह खुद एक गरीब युवक की हत्या और उसकी लाश को ठिकाने लगाने की साजिश रच रहा था।”
4. एसपी अंकित सोनी का ‘स्पेशल 12’ प्लान
सितंबर 2024 में जब रामवीर को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली, तो उसने गुना में फूल-मालाओं के साथ जुलूस निकाला। इसे चुनौती मानते हुए गुना एसपी अंकित सोनी ने एक गोपनीय ऑपरेशन चलाया:
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गोपनीयता: छापेमारी से पहले पुलिसकर्मियों के मोबाइल जमा करा लिए गए।
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गिरफ्तारी: ‘स्पेशल 12’ की टीम ने सादा वर्दी में घेराबंदी कर रामवीर को उसके घर से दबोच लिया। उस पर जालसाजी और गवाहों को धमकाने के नए मामले दर्ज किए गए।
5. जेल से भी चलता था सिक्का, अब रीवा शिफ्ट
जेल जाने के बाद भी दाऊ का रसूख कम नहीं हुआ। वह जेल के अंदर से ही गवाहों को 50 लाख रुपये का लालच और जान से मारने की धमकियां दे रहा था। जब इंटेलिजेंस को इसकी भनक लगी, तो प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए उसे रातों-रात गुना से रीवा सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया, ताकि वह अपने प्रभाव क्षेत्र से दूर रहे।
वर्तमान स्थिति
आज रामवीर दाऊ पर हत्या, अपहरण और धोखाधड़ी जैसे 7 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं। करोड़ों की बेनामी संपत्ति और विदेशी कुत्तों का शौक रखने वाला यह ‘सुपर कॉप’ अब कानून के शिकंजे में है I








