गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले में ‘पुलिस हवाला रकम लूट कांड’ ने खाकी की साख पर जो दाग लगाए हैं, उन्हें धोने की जिम्मेदारी अब IPS हितिका वासल के कंधों पर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एसपी अंकित सोनी को हटाने के बाद 2017 बैच की इस प्रभावशाली अधिकारी पर भरोसा जताया है। अपनी सख्त कार्यशैली और बौद्धिक क्षमता के लिए जानी जाने वाली हितिका वासल के सामने अब विभाग की छवि सुधारने की बड़ी चुनौती है।
न्यूज़ हेडलाइंस
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बड़ा बदलाव: हवाला कांड के बाद अंकित सोनी की छुट्टी, हितिका वासल बनीं नई एसपी।
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शानदार बैकग्राउंड: दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और मैनचेस्टर से मास्टर डिग्री।
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बौद्धिक धनी: ‘आंतरिक सुरक्षा’ पर सर्वश्रेष्ठ निबंध के लिए मिल चुका है सम्मान।
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अनुभवी अधिकारी: इंदौर और ग्वालियर में कानून-व्यवस्था संभालने का लंबा अनुभव।
शिक्षा और सफर: मैनचेस्टर से खाकी तक
मूल रूप से पंजाब की रहने वाली हितिका वासल का शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है:
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स्कूली शिक्षा: चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित डीएवी (DAV) स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा।
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उच्च शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में बीए ऑनर्स और उसके बाद मैनचेस्टर (यूके) से इसी विषय में मास्टर डिग्री हासिल की।
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कैडर: वे 2017 बैच की अधिकारी हैं और राजस्थान कैडर से मध्य प्रदेश आई हैं।
पुरस्कार और पहचान: ‘सर्वश्रेष्ठ निबंध’ की विजेता
हितिका वासल न केवल फील्ड पर सख्त हैं, बल्कि पुलिसिंग की बारीकियों और आंतरिक चुनौतियों पर भी गहरी पकड़ रखती हैं। उन्हें ‘आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों’ पर देश का सर्वश्रेष्ठ निबंध लिखने के लिए ‘1970 आरआर विजेता’ के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। उनकी छवि एक सुलझी हुई और नियम-कायदों पर चलने वाली अधिकारी की है।
मध्य प्रदेश में अनुभव: सतना से इंदौर तक का सफर
गुना एसपी बनने से पहले उन्होंने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में अपनी कार्यकुशलता साबित की है:
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इंदौर: वर्तमान में वे सेनानी (15वीं वाहिनी, विस इंदौर) के पद पर तैनात थीं। इससे पहले वे इंदौर ग्रामीण एसपी के रूप में भी सराहनीय कार्य कर चुकी हैं।
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सतना: प्रोबेशन के दौरान उन्होंने डीएसपी के रूप में सतना में जमीनी पुलिसिंग की बारिकियाँ सीखीं।
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एएसपी: अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तौर पर भी उन्होंने कानून-व्यवस्था को बखूबी संभाला।
गुना में सबसे बड़ी चुनौती: ‘काली भेड़ों’ पर नकेल
गुना में हाल ही में कार से 1 करोड़ रुपये पकड़े जाने और फिर 20 लाख में ‘सेटलमेंट’ करने के आरोपों ने पुलिस विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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पहला काम: विभाग के भीतर छिपे भ्रष्ट कर्मियों (काली भेड़ों) पर कार्रवाई करना।
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छवि सुधार: आम जनता के बीच पुलिस के खोए हुए विश्वास को वापस लौटाना।
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अपराध नियंत्रण: जिले में सक्रिय माफिया और हवाला कारोबारियों के नेटवर्क को ध्वस्त करना।









