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खंडवा के जंगलों में ‘जंग’: अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम पर हमला; महिलाओं को ढाल बनाकर दी ‘हड्डियां तोड़ने’ की धमकी

खंडवा। जिले के गुड़ी वनपरिक्षेत्र में वन भूमि को माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने गई टीम को भारी विरोध और हिंसक ...

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| सतना टाइम्स

खंडवा। जिले के गुड़ी वनपरिक्षेत्र में वन भूमि को माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने गई टीम को भारी विरोध और हिंसक झड़प का सामना करना पड़ा। पिपलोद थाना क्षेत्र की आमा खुजरी बीट में जब वन विभाग का दस्ता अवैध झोपड़ियां हटाने पहुँचा, तो अतिक्रमणकारियों ने न केवल सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि अधिकारियों को सरेआम “हड्डियां तोड़ देने” की धमकी भी दी। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सुरक्षा कारणों से टीम को बैरंग वापस लौटना पड़ा।

न्यूज़ हेडलाइंस 

  • सुनियोजित हमला: महिलाओं और बच्चों को आगे कर भीड़ ने लाठी-डंडों से टीम को खदेड़ा।

  • बड़ा कब्जा: 12 हजार हेक्टेयर में से करीब 3 हजार हेक्टेयर जंगल पर माफिया का कब्जा।

  • रातों-रात निर्माण: 21 मार्च की रात मिलाईखेड़ा बीट में अचानक खड़ी कर दी गईं अवैध झोपड़ियां।

  • पुलिस एक्शन: पिपलोद थाने में नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS 2023 के तहत मामला दर्ज।


साजिश के तहत ‘ढाल’ बनीं महिलाएं

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह अतिक्रमण कोई आकस्मिक घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। खरगोन के झिरनिया और बामंदा जैसे इलाकों से आए लोग योजनाबद्ध तरीके से पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं।

  • रणनीति: कार्रवाई के दौरान जानबूझकर महिलाओं को आगे कर दिया जाता है ताकि पुलिस और वन विभाग बल प्रयोग न कर सके।

  • धमकी भरा अंदाज: भीड़ ने वनकर्मियों को घेर लिया और गाली-गलौज करते हुए उन पर हमला करने की कोशिश की, जिससे अमले को पीछे हटना पड़ा।

3000 हेक्टेयर जंगल पर ‘माफिया’ की नजर

गुड़ी वनपरिक्षेत्र का गणित बेहद चिंताजनक है। यहाँ के कुल जंगल का करीब 25% हिस्सा (3 हजार हेक्टेयर) पहले ही अवैध कब्जों और कटाई की भेंट चढ़ चुका है। वन संपदा को होने वाला यह नुकसान अरबों में है, लेकिन स्थानीय दबाव और भौगोलिक स्थिति (खरगोन सीमा से सटा होना) के कारण अपराधी एक जिले में वारदात कर दूसरे में छिप जाते हैं।


अगली कार्रवाई की तैयारी: ‘भारी बल के साथ होगी स्ट्राइक’

वन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी रास्ता अख्तियार किया है।

“हमने पिपलोद थाने में शिकायत दर्ज करा दी है। सरकारी जमीन पर कब्जा और वनकर्मियों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब हम भारी पुलिस बल और जिला प्रशासन के साथ दोबारा बड़ी स्ट्राइक करेंगे।”

वन विभाग अधिकारी, खंडवा


जंगलों में अतिक्रमण: एक गंभीर नासूर

मध्य प्रदेश के जंगलों में अतिक्रमण की समस्या लगातार विकराल होती जा रही है। खंडवा का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि वन संपदा की रक्षा करना अब वन विभाग के लिए जान जोखिम में डालने जैसा काम हो गया है। वोट बैंक की राजनीति और स्थानीय रसूख अक्सर इन कार्रवाइयों की राह में रोड़ा बनते हैं।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें