निवाड़ी (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिला मुख्यालय पर बीते रोज हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी के मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रभारी मंत्री नारायण कुशवाहा और कलेक्टर को घेरने व शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
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क्या था पूरा मामला?
ओरछा तहसील के गुदरई गांव के किसान अपनी जमीन के सीमांकन और कब्जे की समस्या को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। उस समय प्रभारी मंत्री नारायण कुशवाहा वहां बैठक कर रहे थे।
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भड़काई गई भीड़: बैठक के बाद जब मंत्री बाहर निकले, तो उन्होंने किसानों से आवेदन लिया। लेकिन आरोप है कि भीड़ में मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने किसानों को भड़का दिया।
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अधिकारियों को दौड़ाया: उग्र भीड़ ने न केवल प्रभारी मंत्री के वाहन को रोकने की कोशिश की, बल्कि कलेक्टर की गाड़ी को भी जबरन रुकवा लिया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि कलेक्टर को सुरक्षा के लिए सक्रिय होना पड़ा और उपद्रवियों ने उन्हें घेरे रखा।
पुलिस की कार्रवाई: 7 नामजद और 22 अज्ञात
कोतवाली थाना पुलिस ने उपनिरीक्षक शाहिद खान की शिकायत पर शासकीय कार्य में बाधा, आपराधिक बल का प्रयोग और शांति भंग करने की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
नामजद आरोपी:
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गंगाराम कुशवाहा (ओरछा)
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प्रमोद कुशवाहा (निवाड़ी)
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प्रीतम कुशवाहा (असाटी)
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डॉ. जगत कुशवाहा (ओरछा)
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संजीव केसरिया (झांसी, यूपी)
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सुनील राजपूत (निवाड़ी)
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उर्मिला कुशवाहा (गुदरई)
किसानों को ‘मोहरा’ बनाने का आरोप
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि किसानों की जायज मांग की आड़ में कुछ बाहरी और असामाजिक तत्वों ने सुनियोजित तरीके से हिंसक माहौल पैदा किया। इन लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ झूमा-झटकी की और कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती दी। पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य 22 अज्ञात आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।
प्रशासन का रुख
निवाड़ी पुलिस और प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना सबका हक है, लेकिन अधिकारियों को घेरना और हिंसा फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और संदिग्धों की तलाश जारी है।








