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रिश्तों की अनूठी मिसाल: बहन ने भाई के लिए ‘कलेजे का टुकड़ा’ किया दान; 47 वर्षीया नेहा ने लिवर डोनेट कर भाई को दिया नया जीवन, मेदांता में हुआ सफल ट्रांसप्लांट

बड़वानी (सेंधवा) | कहा जाता है कि भाई-बहन का रिश्ता दुनिया में सबसे पवित्र होता है, और सेंधवा की नेहा मनीष अग्रवाल ...

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| सतना टाइम्स

बड़वानी (सेंधवा) | कहा जाता है कि भाई-बहन का रिश्ता दुनिया में सबसे पवित्र होता है, और सेंधवा की नेहा मनीष अग्रवाल ने इसे चरितार्थ कर दिखाया है। अपने 55 वर्षीय भाई सुशील कुमार अग्रवाल को गंभीर लिवर की बीमारी से बचाने के लिए नेहा ने अपने लिवर का हिस्सा दान कर उन्हें नई जिंदगी दी है। 18 अप्रैल को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

मुख्य बिंदु

  • अंतिम विकल्प: सुशील कुमार का लिवर पूरी तरह खराब हो चुका था और ट्रांसप्लांट ही उन्हें बचाने का एकमात्र रास्ता था।

  • सफल सर्जरी: देश के दिग्गज लिवर विशेषज्ञ डॉ. अरविंदर सिंह सोइन के नेतृत्व में 12 घंटे तक चली रोबोटिक सर्जरी।

  • परिवार का संबल: नेहा के पति मनीष अग्रवाल और चारों बच्चों ने इस फैसले में उनका पूरा साथ दिया।

  • नया जीवन: अब भाई और बहन दोनों स्वस्थ हैं और रिकवरी की राह पर हैं।


12 घंटे चली ‘जिंदगी’ की जंग

गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक के जरिए इस ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया गया।

  1. जटिल प्रक्रिया: डोनर सर्जरी ही करीब 7 घंटे तक चली, जिसमें नेहा के लिवर का एक हिस्सा सुरक्षित निकाला गया।

  2. विशेषज्ञों की टीम: डॉ. अरविंदर सिंह सोइन और उनकी टीम ने पूरी सटीकता के साथ सुशील कुमार के शरीर में लिवर का प्रत्यारोपण किया।

पति और ससुराल बना ताकत

आमतौर पर अंगदान जैसे बड़े फैसलों में हिचकिचाहट देखी जाती है, लेकिन नेहा के पति मनीष अग्रवाल ने मिसाल पेश की। उन्होंने न केवल नेहा को प्रोत्साहित किया, बल्कि पूरी पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए उन्हें इस नेक कार्य के लिए मजबूती दी।


क्यों खास है लिवर ट्रांसप्लांट?

मेडिकल साइंस के अनुसार, लिवर शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है जो दोबारा विकसित (Regenerate) होने की क्षमता रखता है।

  • पुनर्जीवन: दान किया गया हिस्सा रिसीवर के शरीर में विकसित होने लगता है, वहीं डोनर (नेहा) का लिवर भी कुछ ही महीनों में फिर से अपने सामान्य आकार में आ जाता है।

  • नया भविष्य: सुशील कुमार, जो मूलतः भिकनगांव के निवासी हैं और अब इंदौर में रहते हैं, अब एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकेंगे।


समाज के लिए एक बड़ा संदेश

नेहा का यह कदम केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि समाज के लिए अंगदान के प्रति जागरूकता का संदेश है। भाई-बहन के प्रेम की यह कहानी विंध्य और निमाड़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।


खबर का सारांश 

  • डोनर: नेहा मनीष अग्रवाल (47 वर्ष), सेंधवा।

  • रिसीवर: सुशील कुमार अग्रवाल (55 वर्ष), इंदौर।

  • अस्पताल: मेदांता, गुरुग्राम (हरियाणा)।

  • विशेषज्ञ: डॉ. अरविंदर सिंह सोइन।

प्रांशु विश्वकर्मा, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और कंटेंट राइटर है।जो बिजनेश और नौकरी राजनीति जैसे तमाम खबरे लिखते है।... और पढ़ें