उज्जैन की पावन नगरी में हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) के आगमन की तैयारियां तेज हो गई हैं। गुड़ी पड़वा (19 मार्च 2026) के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के शिखर पर ‘ब्रह्मध्वज’ स्थापित किया जाएगा। काल गणना के केंद्र और सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जैन में यह उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का भव्य प्रदर्शन होगा। सृष्टि के आरंभ की तिथि मानी जाने वाली चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर अवंतिका नगरी पूरी तरह केसरिया रंग में रंगी नजर आएगी।

महाकाल मंदिर में ‘ब्रह्मध्वज’ स्थापना
भगवान महाकालेश्वर मंदिर में गुड़ी पड़वा पर ब्रह्मध्वज फहराने की परंपरा सदियों पुरानी है:
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वैदिक मंत्रोच्चार: मंदिर के शीर्ष शिखर पर पंडे-पुजारियों द्वारा विशेष पूजन-अर्चन और वेदोक्त मंत्रों के साथ ध्वज बदला जाएगा।
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सृजन का प्रतीक: धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। महाकाल (काल के अधिपति) के दरबार में ब्रह्मध्वज फहराना नई शुरुआत और विजय का प्रतीक माना जाता है।
सम्राट विक्रमादित्य की नगरी में ‘विक्रम संवत’
उज्जैन का महत्व नववर्ष के लिए इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ से विक्रम संवत का सीधा नाता है:
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ऐतिहासिक केंद्र: सम्राट विक्रमादित्य ने यहीं से विक्रम संवत की शुरुआत की थी।
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काल गणना: उज्जैन को प्राचीन काल से ही दुनिया का मानक समय (Standard Time) तय करने वाला केंद्र माना जाता रहा है, इसलिए यहाँ नववर्ष का स्वागत पूरे देश के लिए खास होता है।
शहरभर में गूँजेंगे शंख और गूँजेगी ‘गुड़ी’
सिर्फ महाकाल मंदिर ही नहीं, बल्कि पूरे उज्जैन में उत्साह का माहौल रहेगा:
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मंदिरों में ध्वज: हरसिद्धि माता, काल भैरव और मंगलनाथ सहित शहर के सभी प्रमुख मंदिरों में नए ध्वज स्थापित किए जाएंगे।
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घर-घर में गुड़ी: स्थानीय निवासी अपने घरों के बाहर ‘गुड़ी’ (बांस पर सुंदर वस्त्र, नीम की पत्तियां और शक्कर की माला) सजाकर नववर्ष का स्वागत करेंगे।
अन्य प्रमुख आयोजन और विकास की सौगात
इस बार का नववर्ष उज्जैन के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है:
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सीएम और राज्यपाल का दौरा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और महामहिम राज्यपाल इस दिन उज्जैन में कई करोड़ों की सौगातें देंगे, जिसमें गीता भवन का भूमि-पूजन भी शामिल है।
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सांस्कृतिक संध्या: शिप्रा तट (रामघाट) पर विशेष आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
हिंदू नववर्ष 2083: मुख्य बिंदु
| विवरण | जानकारी |
| तिथि | 19 मार्च 2026 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) |
| मुख्य स्थान | श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, उज्जैन |
| विशेष आयोजन | शिखर पर ब्रह्मध्वज आरोहण और विक्रम उत्सव। |
| महत्व | विक्रम संवत की शुरुआत और सृष्टि का आरंभ दिवस। |








