भोपाल/प्रयागराज:मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने ‘धर्म की राह’ से अलग होने की घोषणा कर दी है। महाकुंभ के दौरान अपने ग्लैमरस अंदाज और भक्ति के संगम के कारण विवादों में रहीं हर्षा ने बताया कि मौनी अमावस्या के बाद वे वापस अपने पुराने प्रोफेशन (एंकरिंग/मॉडलिंग) में लौट जाएंगी।
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विरोध और आर्थिक तंगी ने तोड़ा मनोबल
हर्षा ने वीडियो में अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि धर्म के रास्ते पर चलते हुए उन्हें समाज और सिस्टम के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
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उधारी का बोझ: हर्षा ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि उन्होंने धर्म को धंधा बनाकर करोड़ों कमाए। उन्होंने दावा किया, “जब मैं एंकरिंग और विदेश में काम कर रही थी, तब बहुत खुश थी और पैसे कमा रही थी। आज मैं कर्ज में डूबी हुई हूँ और मेरे पास सिर्फ उधारी बची है।”
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चरित्र पर प्रहार: उन्होंने समाज पर तंज कसते हुए कहा कि यहाँ किसी महिला के चरित्र पर सवाल उठाना सबसे आसान काम है।
“मैं विद्रोही बनकर जा रही हूँ”
हर्षा ने अपने वीडियो में कई तीखे सवाल उठाए और साफ किया कि उनका जाना सामान्य नहीं होगा:
“मैं कोई सीता नहीं हूँ जो बार-बार अग्निपरीक्षा दूँ। मैंने कोई चोरी, लूटपाट या बलात्कार नहीं किया, फिर भी मुझे बार-बार रोका गया। अब मैं एक विद्रोही मानसिकता लेकर इस रास्ते को छोड़ रही हूँ।”
विवादों से रहा है पुराना नाता
हर्षा रिछारिया तब चर्चा में आई थीं जब महाकुंभ में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई के दौरान उनके वीडियो वायरल हुए थे। इसके बाद संत समाज और सोशल मीडिया पर दो गुट बन गए थे:
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समर्थक: जो उनके बदलाव (मॉडल से साध्वी) को सराह रहे थे।
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विरोधी: जो इसे ‘पब्लिसिटी स्टंट’ और अखाड़ों की परंपरा के खिलाफ बता रहे थे।
आगे का प्लान: मौनी अमावस्या के बाद वापसी
हर्षा ने घोषणा की है कि वह माघ मेले में मौनी अमावस्या का स्नान करने के बाद अपने साध्वी स्वरूप को विराम देंगी। उन्होंने संकेत दिया है कि वह अपनी पुरानी पेशेवर जिंदगी में लौटेंगी जहाँ उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर थी।
हर्षा रिछारिया विवाद: मुख्य बिंदु
| विषय | विवरण |
| चर्चा की वजह | महाकुंभ 2025 में निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में शामिल होना। |
| वर्तमान स्थिति | आर्थिक तंगी और कर्ज में डूबे होने का दावा। |
| फैसला | धर्म की राह छोड़कर पुराने प्रोफेशन में वापसी। |
| अंतिम तिथि | मौनी अमावस्या (2026) के बाद। |








